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Showing posts with the label राजस्थान संस्कृति

जवानरासो - सीताराम रतनू

Q. ऐतिहासिक कविता 'जवानरासो' निम्नलिखित में से किस युद्ध पर आधारित है (1) तुंगा का युद्ध (2) मालपुरा का युद्ध (3) बगरू का युद्ध⁷ (4) बोराज का युद्ध Q ➤ ऐतिहासिक कविता 'जवानरासो' निम्नलिखित में से किस युद्ध पर आधारित Ans ➤ Answer - बोराज का युद्ध 👁 Show Answer जवान रासो (सीताराम रतनू)- जवान रासो नामक पुस्तक सीताराम रतनू के द्वारा लिखी गई है। जवान रासो में मेवाड़ के राजा महाराणा जवान सिंह की जानकारी मिलती है।

सिंधु घाटी सभ्यता,sindhu ghati sabhyata pdf and hrapa sabhyata,

सिंधु घाटी सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता (sindhu ghati sabhyata) Part - 1 1. हड़प्पा(hrapa sabhyata) नदी के नाम: रावी  Q. hadappa sabhyata ki khoj kab hui? Ans- उत्त्खनन का वर्ष: 1921 उत्तखननकर्ता: दयाराम साहनी और माधोस्वरूप वत्स वर्तमान स्तिथि: पश्चिम पंजाब का मांटमोगरी जिला (पाकिस्तान) 2. मोहनजोदड़ो नदी के नाम: सिन्धु उत्त्खनन का वर्ष: 1922 उत्तखननकर्ता: राखलदास बनर्जी वर्तमान स्तिथि: सिंध प्रान्त का लरकाना जिला (पाकिस्तान) 3. चन्हूदड़ो नदी के नाम: सिन्धु उत्त्खनन का वर्ष: 1931 उत्तखननकर्ता: गोपाल मजूमदार वर्तमान स्तिथि: सिंध प्रान्त(पाकिस्तान) 4. कालीबंगा नदी के नाम: घग्घर उत्त्खनन का वर्ष: 1953 उत्तखननकर्ता: अमलानंद घोष.. बी.बी.लाल और बी.के. थापर वर्तमान स्तिथि: राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला (भारत) 5. कोटदीजी नदियों के नाम: सिन्धु उत्त्खनन का वर्ष: 1935 उत्तखननकर्ता: फजल अहमद वर्तमान स्तिथि: सिंध प्रान्त का खैरपुर (पाकिस्तान) 6. रंगपुर नदियों के नाम: मादर उत्त्खनन का वर्ष: 1933 उत्तखननकर्ता: रंगनाथ राव वर्तमान स्तिथि: गुजरात का काठियावाड क्षेत्र (भारत) ...

हड़बूजी(hadbu ji)- rajasthan ke pramukh lok devta

हड़बूजी(hadbu ji) राजस्थान के प्रमुख लोक देवता 1. हड़बूजी भूंडोल (नागौर) के राजा मेहाजी सांखला के पुत्र थे व मारवाड़ के राव जोधा के समकालीन थे। 2. लोकदेवता रामदेव जी हड़बू जी के मौसेरे भाई थे, जिनकी प्रेरणा से हड़बू जी ने योगी बालीनाथ से दीक्षा ली तथा बाबा रामदेव जी के समाज सुधार के लक्ष्य के लिए उन्होंने आजीवन पूर्ण निष्ठा से कार्य किया। 3. बेंगटी ( फलौदी ) में हड़बू जी का मुख्य पूजा स्थल है एवं इनके पुजारी साँखला राजपूत होतें हैं । 4. श्रृद्धालुओं द्वारा मनायी गई मनौती या कार्य सिद्ध होने पर गाँव बेंगटी में स्थापित मंदिर में ' हड़बू जी की गाड़ी ' की पूजा की जाती है । इस गाड़ी में हड़बूजी पंगु गायों के लिए घास भर कर दूर-दूर से लाते थे ।  राजस्थान के लोक देवता गोगाजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता पाबूजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता रामदेव जी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता तेजाजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता देवनारायण जी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता मेहाजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता रूपनाथ जी(झरड़ा जी) ✍✍ राजस्थान के लोक देवता हड़बुजी  ✍✍

रूपनाथ जी (झरड़ा)- राजस्थान के लोक देवता

रूपनाथ जी (झरड़ा)- राजस्थान के लोक देवता पिता- बूढो जी (पाबूजी के बड़े) अन्य नाम- बालकनाथ  विवरण- यह पाबूजी के बड़े भाई बूढो जी के पुत्र थे इन्होंने अपने पिता वह चाचा (पाबूजी)की मृत्यु का बदला जिंदराव खिची को मार कर लिया कोलूमुंड (जोधपुर) के पास पहाड़ी पर खींची को मारा । प्रमुख थान - बीकानेर के सिंभूदड़ा (नोखामंडी) पाबूजी द्वारा किये गए कार्यो को आगे बढ़ाया तथा हिमाचल प्रदेश में इन्हें बालकनाथ के रूप में पूजा जाता है। राजस्थान के लोक देवता गोगाजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता पाबूजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता रामदेव जी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता तेजाजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता देवनारायण जी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता मेहाजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता रूपनाथ जी(झरड़ा जी) ✍✍ राजस्थान के लोक देवता हड़बुजी  ✍✍

मांगलियों के इष्ट देव मेहाजी-Mehoji Mangaliyaa

मांगलियों के इष्ट देव मेहाजी-Mehoji Mangaliyaa जन्म- विक्रम संवत 1332(1388) पिता- केलु जी घराना- सिसोदिया वंशीय राजपूत विवाह- महेचा मलीनाथ की बेटी के साथ हुआ निधन- रातडिये मगरे क्षेत्र- जोधपुर (बापीणी) मेहाजी सभी मांगलियों के इष्ट देव के रूप में पूजे जाते हैं । मेहाजी का सारा जीवन धर्म की रक्षा और मर्यादाओं के पालन में बीता । जैसलमेर के राव राणंगदेव भाटी से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।  बापणी में इनका मंदिर है । भाद्रपद में कृष्ण जन्माष्टमी को मांगलिया राजपूत मेहाजी की अष्टमी मनाते हैं। लोक मान्यता है कि इनकी पूजा करने वाले भोपा को वंश वृद्धि नहीं होती । वे गोद लेकर पीढ़ी आगे चलाते हैं। किरड़ काबरा' घोड़ा मेहाजी का प्रिय घोड़ा था।  Loading... राजस्थान के लोक देवता गोगाजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता पाबूजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता रामदेव जी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता तेजाजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता देवनारायण जी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता रूपनाथ जी(झरड़ा जी) ✍✍ राजस्थान के लोक देवता हड़बुजी  ✍✍

देवनारायण जी का जीवन परिचय-dev narayan ji

देवनारायण जी का जीवन परिचय-dev narayan ji पिता-                सवाई भोज (father)  माता-                साडू (mother) जीवनसाथी-      पीपल दे क्षेत्र-                 राजस्थान, हरियाणा,मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश त्यौहार-            देवनारायण जयन्ती, मकर संक्रांति, देव                                 एकादशी अस्त्र -             तलवार, भाला   देवजी का जन्म संवत्‌ 1300 में बगड़ावत परिवार में हुआ। वे सवाईभोज और सेढू के पुत्र थे। इनका जन्म का नाम उंदयसिह था। देवनारायण का घोड़ा 'लीलागर' था! इनकी पत्नी धार नरेश जयसिह को पुत्री पोपले थी।  इन्होंने अपने पिता की हत्या का बदला लिया तथा अपने पराक्रम और सिद्धियों का प्रयोग अन्याय का प्रतिकार करने और जनकल्याण में किया । देवमाली ( ब्यावर ) में इन्हे में इन...

लोक देवता वीर तेजाजी महाराज, lok devta veer tejaji maharaj

पिता - ताहड़ जी जाट माता- राजकुमारी पत्नी- पेमलदे 1. लोक देवता वीर तेजाजी महाराज खड़नाल ( नागौर ) के नागवंशीय जाट   थे। 2. इन्होंने लाछा गूजरी की गायें मेरों से छुड़ाने हेतु अपने प्राणोत्सर्ग किए । 3. इनके थान पर सर्प व कुत्ते काटे प्राणी का इलाज होता है । प्रत्येक किसान तेजाजी के गीत के साथ ही बुवाई प्रारम्भ करता है । ऐसा विश्वास है कि इस स्मरण से भावी फसल अच्छी होगी। 4. तेजाजी विशेषतः अजमेर जिले के लोकदेवता हैं । इनके मुख्य 'थान' अजमेर जिले के सुरसुरा,ब्यावर,सेंदरिया एवं भावतां में हैं । उनके जन्म स्थान गढ़वाल में भी इनका मंदिर है। 5. नागौर जिले के परबतसर कस्बे में तेजाजी का विशाल मेला भाद्रपद शुक्ला दशमी को भरता है। जहाँ भारी मात्रा में पशुओं की भी खरीद फरोख्त होती हैं तेजाजी की निर्वाण स्थली सुरसुरा ( अजमेर ) में तेजाजी की जागीर्ण निकाली जाती है। 6. सर्पदंश का इलाज करने वाले तेजाजी के भोपे को ' घोड़ला ' कहते हैं। 7. तेजाजी की घोड़ी लीलण (सिणगारी) थी। राजस्थान के लोक देवता गोगाजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता पाबूजी ✍✍ राजस्थान के लोक देवता रामदेव जी...

लोक देवता बाबा रामदेव जी(रामसा पीर)

लोक देवता बाबा रामदेव जी का जीवन परिचय :- 1. सम्पूर्ण राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों में ' रामसा पीर' , 'रुणीचा रा रुणीचा रा धणी ',व बाबा रामदेव नाम से प्रसिद्ध लोकदेवता है।  प्रश्न:- बाबा रामदेव जी की जाति व वंशावली  है? उत्तर:-  रामदेवजी का जन्म तॅवर वंशीय ठाकुर अजमाल जी के यहां हुआ।इनकी माता का नाम मैणादे थे। ये अर्जुन के वंशज माने जाते हैं । प्रश्न:- बाबा रामदेव के पिता का नाम था? उत्तर:-अजमाल  जी प्रश्न:-  रामदेव जी महाराज का जन्म कब हुआ था ? उत्तर:- रामदेव जी का जन्म भ्राद्रपद शुक्ला द्वितीया सं. 1462( सन्‌ 1405) को बाड़मेर की शिव तहसील के उण्डु कासमेर गॉंव में हुआ था । प्रश्न:-रामदेव जी महाराज की मृत्यु कब हुई थी? उत्तर:- भाद्रपद सुदी एकादशी सं.1515(सन्‌ 1458) को इन्होंने रुणीचा के राम सरोवर के किनारे जीवित समाधि ली थी । 2 .रामदेव जी का जन्म कैसे हुआ? राजा अजमल जी भैरव राक्षस को मारने का उपाय सोचते हुए द्वारका पहुंचे। जहां अजमल जी को भगवान के साक्षात दर्शन हुए, कहा, हे भक्तराज रो मत मैं तुम्हारा सारा दु:ख जानता हूँ। मैं तेरी भ...

रामदेव जी की कथा

इतिहासकारों  के अनुसार श्री कृष्ण के अवतार रामदेव  जी का अवतार सन 1442 में भादवा सुदी दूज के दिन राजस्थान के पोकरण के तॅवर वंशीय राजा अजमल के यहां हुआ था. राजा अजमल श्री कृष्ण की भक्ती में लीन रहने के साथ ही धर्मपरायण राजा थे लेकिन वह निसंतान थे जिसके कारण वह काफी दुखी रहते थे. रामदेव जी के पिता राजा अजमल जो कि द्वारकाधीश के परम भक्त थे वह हमेशा अपने राज्य की सुख शांति की मनोकामना के लिए  द्वारका जाते थे. एक बार उनके राज्य में भयानक अकाल पड़ा और राज्य में अच्छी बारिश की मनोकामना लेकर अजमल जी द्वारिकाधीश पहुंच गए ऐसा माना जाता है कि भगवान द्वारिकाधीश की कृपा से उनके राज्य में बहुत अच्छी बारिश हुई. बारिश के ही दिन में जब एक दिन  सुबह किसान अपने खेतों में जा रहे थे. तो रास्ते में उन्हें उनके राजा अजमल मिल गए किसान उन्हें देख वापस घर की तरफ जाने लगे यह देख राजा ने पूछा कि वापस क्यों जा रहे हो तो किसानों ने बताया कि राजा अजमल जी आप निसंतान है इसलिए आपके सामने आने से अपशगुन हो गया है और अपशगुन के समय में हम बुआई नहीं करेंगे. राजा ने जैसे ही यह सुना तो बहुत दुखी हुए...

सांपों का देवता गोगाजी (gogaji)

📒 जीवन परिचय:- गोगाजी (गोगापीर) चौहान वंशीय गोगाजी का जन्म 11वीं सदी में चुरू जिले के ददरेवा नामक स्थान पर जेवरसिंह-बाछल के घर हुआ। ददरेवा में इनके स्थान को शीर्षमेड़ी कहते हैं जहाँ हर वर्ष गोगाजी का मेला भर भरता है। | 📒 सांपों का देवता:- इन्हें सांपों का देवता माना जाता है । राजस्थान का किसान वर्षा के बाद हल जोतने से पहले गोगाजी के नाम की राखी ' गोगा राखड़ी ' हल और हाली, दोनो के बाँधता है । इन्हें सर्पदंश से बचाव हेतु पूजा जाता है |  गोगाजी ने गौ- रक्षार्थ एवं मुस्लिम आक्रांताओं (महमूद गजनवी) से देश की रक्षार्थ अपने प्राण न्यौछावर कर दिये । इसलिए इन्हें लोकदेवता के रूप में पूजा जाने लगा। इन्हें जाहरपीर ' या ' गुग्गा ! के नाम से भी पूजा जाता है ।  📒  अन्य महत्वपुर्ण बातें:- ⓵गोगाजी के ' थान ' खेजड़ी वृक्ष के नीचे होते हैं, जहाँ मूर्ति स्वरूप एक पत्थर पर सर्प की आकृति अंकित होती है  ⓶    गोगाजी के जन्म स्थल ददरेवा को शीर्ष मेड़ी तथा समाधि स्थल ' गोगा मेड़ी ' (नोहर-हनुमानगढ़ ) को ' धुरमेडी 'भी कहते हैं । गोगामेड़ी में प्रतिवर्ष,भाद्पद्‌ क...

पाबूजी(pabuji),प्लेग रक्षक एवं ऊँटों के देवता

📒 जीवन परिचय:- राठौड़ राजवंश के पाबूजी राठौड़ का जन्म  13वीं शताब्दी में फलौदी (जोधपुर) के निकट कोलूमण्ड में  धाँधल एंव कमलादे के घर हुआ। ये राठौड़ों के मूल पुरुष राव सीहा के वंशज थे । इनका विवाह अमरकोट के राजा सूरजमल सोढा की पुत्री सुप्यारदे से हो रहा था कि ये फेरों के बीच से ही उठकर अपने बहेनोई  जीन्दराव खींची से देवल चारणी (जिसकी केसर कालमी घोड़ी ये माँग कर लाए थे) की गायें छुड़ाने चले गये और देचू  गाँव में युद्ध में वीर गति को प्राप्त हुए। अतः इन्हे गौ-रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है।     📒 प्लेग  रक्षक एवं ऊँटों🐫 के देवता:- प्लेग रक्षक एवं ऊँटों के देवता के रूप में पाबूजी की विशेष मान्यता है। कहा जाता है कि मारवाड़ में सर्वप्रथम ऊट ( सांडे) लाने का श्रेय पाबूजी को ही है । अत: उँटों की पालक राइका ( रेबारी )जाति इन्हें अपना आराध्य देव मानती है । ये थोरी एवं भील जाति में अति लोकप्रिय हैं तथा मेहर जाति के मुसलमान इन्हें  पीर मानकर पूजा करते हैं । इन्हें लक्ष्मण का अवतार भी माना जाता है।   📒 अन्य महत्वपुर्ण बातें:- ➊पाबू जी केसर कालमी...

राजस्थान के लोक देवता/lok Deities of Rajasthan

राजस्थान के लोक देवता अलौकिक चमत्कारों से युक्त एवं वीरता पूर्ण कृत्यों वाले महापुरुष लोक देवता के रूप में प्रसिद्ध हुए । लोकदेवता से तात्पर्य उन महापुरुषों से है, जिन्होंने अपने वीरोचित कार्यों तथा दृढ़ आत्मबल द्वारा समाज में सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना, हिन्दू धर्म की रक्षा तथा जनहितार्थ अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। अत: ये अपनी अलौकिक शक्तियों एवं लोकमंगलकारी कार्यों हेतु लोक आस्था के प्रतीक हो गये तथा इन्हें जनसामान्य द्वारा दुःखहर्ता व मंगलकर्ता के रूप में पूजा जाने लगा। आज भी गाँव- गाँव में इनके ' थान ' देवल-देवरे, या चबूतरे लोक मानस के आस्था केन्द्र के रूप में विद्यमान हैं । जाति-पाति एवं छूआछूत से दूर. इन थानों पर सभी जाति एवं सम्प्रदायों के लोग इनको पूजने आते हैं । गाँव मे हारी-बीमारी में इनकी पूजा की जाती है व मनौतियाँ माँगी जाती हैं तथा उनके पूर्ण हो जाने पर रात्रि जागरण करवाया जाता है अथवा इनकी पड़ बँचवाई जाती है । मारवाड अँचल में इन पाँचों लोकदेवताओं- पाबूजी , हड़बूजी , रामदेवजी , गोगाजी एवं मांगलिया मेहा जी को पंच पीर माना गया हैं। राज्य के प्रमुख लोकदेवताओ...
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