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जामा मस्जिद, भरतपुर - مسجدجامع JAMA MASJID

  जामा मस्जिद, भरतपुर जामा मस्जिद, भरतपुर जामा मस्जिद, भरतपुर जामा मस्जिद, भरतपुर उपनाम जामा मस्जिद, भरतपुर स्थान गंगा मैया मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर, भरतपुर निर्माण महाराजा बलवंत सिंह के शासनकाल में शुरू हो कर महाराजा सवाई बृजेन्द्र सिंह के शासनकाल में पूर्ण हुआ । समय यह मस्जिद लगभग 70 साल में तैयार हुई थी। समर्पण भरतपुर की जामा मस्जिद का विन्यास दिल्ली की जामा मस्जिद की तरह ही है। वास्तुकला इस मस्जिद का निर्माण लाल पत्थर से कराया गया है। महत्व NA

अढाई दिन का झोपड़ा अजमेर

  अढाई दिन का झोपड़ा Adhai Din Ka Jhopra - Ajmer अढाई दिन का झोपड़ा उपनाम सरस्वती कण्ठाभरण पाठशाला (संस्कृत महाविद्यालय) स्थान अजमेर निर्माण कुतुब-उद-दीन ऐबक द्वारा (पहले से निर्मित संस्कृत विद्यालय को तोड़कर ) समय 1194 ई. समर्पण सरस्वती कण्ठाभरण पाठशाला वास्तुकला NA महत्व यहां पर प्रतिवर्ष पंजाब शाह का अढाई दिन का उर्स लगने के कारण इसे अढ़ाई दिन का झोंपड़ा कहते है।

पद्मनाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, सात सहेलियों का मंदिर, घंटियों का मंदिर

  पद्मनाथ मंदिर / सूर्य मंदिर पद्मनाथ मंदिर / सूर्य मंदिर पद्मनाथ मंदिर / सूर्य मंदिर पद्मनाथ मंदिर / सूर्य मंदिर उपनाम सात सहेलियों का मंदिर, घंटियों का मंदिर स्थान झालरापाटन शहर, झालावाड़ निर्माण मालवा के परमार वंशीय राजाओं द्वारा समय 10वीं सदी समर्पण मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान है। वास्तुकला कच्छपात शैली महत्व कर्नल जेम्स टॉड ने इस मंदिर को चारभुजा का मंदिर कहा है।

भांडाशाह जैन मंदिर

  भांडाशाह जैन मंदिर भांडाशाह जैन मंदिर भांडाशाह जैन मंदिर भांडाशाह जैन मंदिर उपनाम घी वाला मंदिर स्थान बीकानेर निर्माण घी व्यवसायी भांडाशाह औसवाल द्वारा समय सन् 1411 (वि.स. 1468) समर्पण जैन धर्म के पाँचवे तीर्थंकर सुमतिनाथ को वास्तुकला मंदिर की वास्तुकला में जैन शैली की विशेषताएँ हैं, जिसमें नक्काशीदार स्तंभ और सुंदर मूर्तियाँ शामिल हैं। महत्व यह मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

Patwar और REET स्पेशल REVISION

  PATWAR- REVISION Contents [ hide ] यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल भारतीय धरोहर 1. ताजमहल - उत्तर प्रदेश [1983] 2. आगरा का किला - उत्तर प्रदेश [1983] 3. अजंता की गुफाएं - महाराष्ट्र [1983] 4. एलोरा की गुफाएं - महाराष्ट्र [1983] 5. कोणार्क का सूर्य मंदिर - ओडिशा [1984] 6. महाबलिपुरम् का स्मारक समूह -तमिलनाडू [1984] 7. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान - असोम [1985] 8. मानस वन्य जीव अभयारण्य - असोम [1985] 9. केवला देव राष्ट्रीय उद्यान - राजस्थान [1985] 10. पुराने गोवा के चर्च व मठ - गोवा [1986] 11. मुगल सिटी, फतेहपुर सिकरी - उत्तर प्रदेश [1986] 12. हम्पी स्मारक समूह - कर्नाटक [1986] 13. खजुराहो मंदिर - मध्यप्रदेश [1986] 14. एलीफेंटा की गुफाएं - महाराष्ट्र [1987] 15. पट्टदकल स्मारक समूह - कर्नाटक [1987] 16. सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान - प. बंगाल [1987] 17. वृहदेश्वर मंदिर तंजावुर - तमिलनाडू [1987] 18. नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान - उत्तराखंड [1988] 19. सांची का बौद्ध स्मारक - मध्यप्रदेश [1989] 21. हुमायूँ का मकबरा - दिल्ली [1993] 22. दार्जिलिंग हिमालयन रेल - पश्च...

राजस्थान व सभी जिलों की आकृति किस के समान है - 2021

हमने राजस्थान का भूगोल part-1 और part-2 मे स्थिति व विस्तार के बारे में पढ़ा और आज हम राजस्थान की के आकृति के बारे में पढ़गे तो शुरुआत करने से पहले हमारी इस पोस्ट पर आप अपनी राय जरूर दें कि आपको पोस्ट कैसी लगी क्योंकि आपकी राय से मैं आगे की पोस्टों को और बेहतर तरीके से लिख पाऊंगा तो शुरुआत करते हैं। Part-3 राजस्थान की आकृति :- 1. विषमकोणीय चतुर्भुज (Rhombus) या 'पतग के समान' (चतुष्कोणीय) । इसके बारे में सर्वप्रथम बताने वाला विद्वान टी. एच. हेण्डले था । राजस्थान की आकृति 2. विश्व स्तर पर तुलना करने पर राजस्थान का आकार एकीकृत जर्मनी से थोड़ा कम, कांगो, वियतनाम, फिनलैंड, नॉर्वे आदि के लगभग बराबर, न्यूजीलैंड एवं ब्रिटेन (UK) से लगभग डेढ़(1.5) गुणा, नेपाल एवं बांग्लादेश से 2.3 गुणा, इजराइल से 13 गुना, स्विट्जरलैंड से 8 गुना व श्रीलंका से 5 गुना है। 3. धौलपुर का सिलावट गांव के पास 'जगमोहन का पूरा' राज्य का सुंदरतंम पूर्वी बिंदु है तथा कटरा गांव (तहसील सम, जैसलमेर) सुंदरतम पश्चिमी बिंदु है राज्य में सूर्योदय व सूर्यास्त दोनों ही सबसे पहले सिलावट गांव के पास 'जगमोहन का...

Rajasthan ka bhugol or bhautik bhugol ki shakha kya hai

आज हम राजस्थान की स्थिति, विस्तार आकृति एवं भौतिक स्वरूप के बारे में पढ़ेंगे तो शुरुआत करने से पहले हमारी इस पोस्ट पर आप अपनी राय जरूर दें कि आपको पोस्ट कैसी लगी क्योंकि आपकी राय से मैं आगे की पोस्टों को और बेहतर तरीके से लिख पाऊंगा तो शुरुआत करते हैं। हम राजस्थान के अध्ययन को निम्न भागों में बांट देंगे जो कि नीचे दिए गए हैं 1. स्थिति (location) 2. विस्तार (Extent) 3. आकृति 4. स्थलीय सीमा 5. भौतिक स्वरूप निम्नलिखित 5 बिंदुओं में से आज हम केवल एक बिंदु राजस्थान की स्थिति (location) के बारे में पड़ेंगे और आगे के बिंदुओ को next पोस्ट में आप देख पाएंगे जिसके लिंक नीचे दिए गए होंगे। Part-1 Rajasthan ki sthiti(स्थिति) :- वीरों की जन्मभूमि कहे जाने वाला राजस्थान हमारे देश भारत के उत्तर पश्चिम भाग में स्थित है तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य (1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद) है इसका क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किलोमीटर (132140 वर्ग मील) है जो भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.41% है जनसंख्या की दृष्टि से राजस्थान देश का सातवां सबसे बड़ा राज्य (...

राजस्थान में गौवंश

                  👉राजस्थान में गौवंश 👉 राजस्थान के पशुपालन में गौवंश का महत्वपूर्ण योगदान है  👉राजस्थान में गौवंश के प्रासि क्षेत्र:- राज्य में सर्वाधिक गौवंश क्रमश: उदयपुर व बीकानेर में तथा न्यूनतम धौलपुर में है। 👉प्रमुख नस्लें 1. गीर:-अजमेर, भीलवाड़ा, किशनगढ़, चित्तौड़गढ़, बूँदी मूल स्थान-गुजरात का गिर वन व काठियावाड़ 2. थारपारकर:- जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, साँचोर (जालौर) अन्य नाम :-रेंडा व अजमेरी। अधिक दूध के लिए प्रसिद्द । 3. नागौरी:-  नागौर, जोधपुर जिले का उत्तरीपूर्वी भाग व नोखा (बीकानेर) मूल स्थान- नागौर जिले का सुहालक प्रदेश 4. राठी:- बीकानेर,श्रीगंगानगर, जैसलमेर व चुरू के कुछ भाग बाड़मेर, साँचौर व नेहड़ क्षेत्र (जालौर) व जोधपुर के कुछ भाग अन्य विवरण :-लाल सिंधी व साहीवाल की मिश्रित नस्ल।राजस्थान की कामधेन। 5. कांकरेज:-  मूल स्थान - सिंध क्षेत्र व मालानी गाँव (जैसलमेर)। 6. हरियाणवी व चुरू:-सीकर, झुंझुनुँ, जयपुर, गंगानगर, हनुमानगढ़  मुल स्थान-रोहतक, हिसार व गुडगाँव (हरियाणा 7. मालवी:- झा...

Rajasthan में गौवंश तथा भैस

                 👉राजस्थान में गौवंश 👉 राजस्थान के पशुपालन में गौवंश का महत्वपूर्ण योगदान है  👉राजस्थान में गौवंश के प्रासि क्षेत्र:- राज्य में सर्वाधिक गौवंश क्रमश: उदयपुर व बीकानेर में तथा न्यूनतम धौलपुर में है। 👉प्रमुख नस्लें 1. गीर:-अजमेर, भीलवाड़ा, किशनगढ़, चित्तौड़गढ़, बूँदी मूल स्थान-गुजरात का गिर वन व काठियावाड़ 2. थारपारकर:- जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, साँचोर (जालौर) अन्य नाम :-रेंडा व अजमेरी। अधिक दूध के लिए प्रसिद्द । 3. नागौरी:-  नागौर, जोधपुर जिले का उत्तरीपूर्वी भाग व नोखा (बीकानेर) मूल स्थान- नागौर जिले का सुहालक प्रदेश 4. राठी:- बीकानेर,श्रीगंगानगर, जैसलमेर व चुरू के कुछ भाग बाड़मेर, साँचौर व नेहड़ क्षेत्र (जालौर) व जोधपुर के कुछ भाग अन्य विवरण :-लाल सिंधी व साहीवाल की मिश्रित नस्ल।राजस्थान की कामधेन। 5. कांकरेज:-  मूल स्थान - सिंध क्षेत्र व मालानी गाँव (जैसलमेर)। 6. हरियाणवी व चुरू:-सीकर, झुंझुनुँ, जयपुर, गंगानगर, हनुमानगढ़  मुल स्थान-रोहतक, हिसार व गुडगाँव (हरियाणा 7. मालवी:- झ...

राजस्थान में पशु सम्पदा / Rajasthan me pas

                  राजस्थान में पशु सम्पदा 👉 राजस्थान में पशुपालन :-राजस्थान में 60% मरूस्थल होने के कारण कृषि के बाद  कृषक की आय का प्रमुख स्रोत है ।जिसमें 90% महिलाओं द्वारा श्रम किया जाता है 👉 राजस्व के कुल का 9-10%पशु सम्पदा से प्राप्त होता है 👉 प्रदेश में उपलब्ध पशुधन देश के लगभग 12%दुग्ध तथा 31% ऊन का  उत्पादन करता है 👉राजस्थान में पशु गणना दिसंबर 1919से अप्रैल 1920 के मध्य में कि गई । 👉 स्वतंत्र राजस्थान की प्रथम पशु गणना 1951 में की गई और कुल पशु सम्पदा 255.17 लाख थी। जिसे राजस्व मंडल द्वारा हर पॉचवें वर्ष की जाती है । 👉 18 वी पशु गणना :- 👉 प्रदेश में 18 वी पशु गणना 15अक्टूबर, 2007 को पहली बार नस्ल के आधार पर आयोजित की गई ।जिसमें कुल पशुधन 566.33 लाख था।और वर्ष 2003 की तुलना में राज्य की पशु सम्पदा में 15.32% की वृद्धि हुई । 👉 2007 में राज्य में सर्वाधिक पशु बकरियां (37.95%) थी।और पशु घनत्व 166 था। 👉प्रदेश में प्रति हजार जनसंख्या पर पशुओं संख्या 826 थी। 👉 19वीं पशु गणना :- 👉19वीं पशु गणना 15अक्टूबर,20...
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