Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Rajasthan police notes in hindi

महिला एवं बाल अपराध के प्रश्न पीडीएफ

किशोर न्याय ( बालकों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 Lesson - 10  महिला एवं बाल अपराध यदि घरेलु हिंसा की कोई सूचना किसी पुलिस अधिकारी या संरक्षण अधिकारी या मजिस्ट्रेट को दी गयी है तो उनके द्वारा पीड़िता को जानकारी देनी होगी कि :  उसे संरक्षण पाने का सेवा प्रदाता की सेवा पाने का संरक्षण अधिकारी की सेवा की उपलब्धता मुफ्त विधिक सहायता प्राप्त करने का परिवाद-पात्र दाखिल करने का अधिकार प्राप्त है। संज्ञेय अपराध के लिए पुलिस को कार्यवाई करने से यह प्रावधान नहीं रोक सकता। अपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 में महिला अपराध की सुनवाई बंद करने तथा कार्यवाही की वीडियोग्राफी करने का भी प्रावधान किया गया है। इस कानून में महिलाओं के विरुद्ध अपराध की एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले पुलिस कर्मियों को दण्डित करने का भी प्रावधान है। अगर कोई पीड़ित महिला पुलिस के पास आती है, तो पुलिस को उसके साथ सहजता, संवेदनशीलता एवं गंभीरता से बात-व्यवहार करना चाहिए। महिला सम्बंधित अपराध की स्थिति में केवल महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही महिला को गिरफ्तार किया जा सकता है। बलात्कार के प्रकरणों में अन्व...

महिला एवं बाल अपराध कानून pdf rajasthan police official

किशोर न्याय ( बालकों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 Lesson- 9  महिला एवं बाल अपराध सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट :- बाल कल्याण पुलिस अधिकारी द्वारा, बच्चे की सामजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट (सोशल बैकग्राउंड रिपोर्ट- एस.बी.आर-प्रारूप 4) बच्चे की किसी अपराध में शामिल होने पर तैयार कर किशोर न्याय बोर्ड को भेजी जायेगी। जिले के सभी बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों, बाल कल्याण अधिकारियों, परिवीक्षा अधिकारियों, पैरालीगल स्वयंसेवियों की इस रिपोर्ट के बारे में समझ होना चाहिए। बच्चों एवं महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों को रेखांकित किया गया है व उनके संरक्षण हेतु बनाए गए कानूनी प्रावधानों एवं प्रक्रियाओं में पुलिस की विशेष भूमिका सुनिश्चित की गयी है। जब भी किसी बच्चे या महिला के प्रति कोई अपराध की घटना होती है या किसी बेसहारा महिला या बच्चे को पाया जाता है तब सबसे पहले, पुलिस से ही इनका संपर्क होता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि पुलिस कर्मी और विशेष रूप से बाल संरक्षण पुलिस अधिकारी, एवं महिला पुलिस अधिकारी बाल एवं महिलाओं से जुड़े कानूनी प्रावधानों से परिचित हों, प्रक्रियाओं के बारे में ...

महिला एवं बाल अपराध कानून pdf rajasthan police

किशोर न्याय ( बालकों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015-    Lesson-8 महिला एवं बाल अपराध सर्वप्रथम किशोर न्याय अधिनियम 1986 में अस्तित्व में आया, जिसे देश भर में सन 2000 से लागू किया गया। इसमें सन 2006 व 2011 में कुछ संशोधन किये गए। सन 2015 में इस कानून में व्यापक परिवर्तन किये गए और यह एक नए स्वरुप में लागू किया गया। इस कानून में 112 धाराएं हैं एवं इसे 10 अध्यायों में विभाजित किया गया है। सन 2016 में इसकी नियमावली बनायीं गयी । इस कानून को नया स्वरुप देने के पीछे कई कारण थे, जिनमें प्रमुख रूप से संधाओं में बच्चों के साथ बढ़ती घटनाएं, अपर्याप्त सुविधायें, देख-रेख एवं पुनर्वास की गुणवत्ता, अधिक संख्या में मामलों का लंबित रहना, दत्तक गृह में विलम्ब तथा 16 साल से 18 साल के बच्चों द्वारा किये जाने वाले जघन्य अपराधों में वृद्धि थी। Contents [ hide ] किस तरह के बच्चों पर यह कानून लागू है :- यह कानून दो तरह के बच्चों- देखभाल एवं संरक्षण वाले बच्चें एवं कानून से संघर्षरत बच्चों के सर्वोत्तम हित के लिए काम करता है। इस कानून के अंतर्गत पहली स्थिति में ऐसे बच्चें शामि...

महिला एवं बाल अपराध के प्रश्न pdf - राजस्थान सब इंस्पेक्टर

महिला एवं बाल अपराध राजस्थान पुलिस PDF and notes यदि आप ने lesson-1 से लेकर 6 तक नहीं पढ़े है तो पहले उन्हें पढ़ ले जिनके link last में दिये गये हैं। last post या lesson  - 6 में हमनें पोक्सो एक्ट व धारा -3 व धारा - 4  के बारें मे पढ़ा था तो आज उसके आगे पढ़ते है । Lesson - 7 Contents [ hide ] गुरुत्तर प्रवेशन लैंगिक हमला में शामिल है : (धारा 5)  यदि कोई किसी जेल, प्रतिप्रेषण गृह, संरक्षण गृह, किसी अस्पताल, सरकारी या प्राइवेट, कोई भी संस्थान- शैक्षणिक, धार्मिक आदि का प्रबंधक या कर्मचारी होते हुए उस परिसर में बच्चे पर प्रवेशन लैंगिक हमला । कोई भी पुलिस अधिकारी होते हुए बच्चे पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है। अपने पुलिस स्टेशन या कार्यक्षेत्र में जहां उसकी नियुक्ति हुई है । किसी भी स्टेशन हाउस के अन्दर, चाहे वो पुलिस स्टेशन के भीतर हो या न हो, जहां पर व नियुक्ति है । अपने ड्यूटी के दौरान या उसके अलावा । जहां पर वह पुलिस अधिकारी के रूप जाना जाता है । जो कोई सशत्र बल या सुरक्षा बल का सदस्य होते हुए बच्चे पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है । उस क्षेत्र सीमा के अन्दर जहां उसकी...

Rajasthan ka bhugol part - 2

हमने राजस्थान का भूगोल part-1 मे स्थिति के बारे में पढ़ा और आज राजस्थान का विस्तार पढ़गे तो शुरुआत करने से पहले हमारी इस पोस्ट पर आप अपनी राय जरूर दें कि आपको पोस्ट कैसी लगी क्योंकि आपकी राय से मैं आगे की पोस्टों को और बेहतर तरीके से लिख पाऊंगा तो शुरुआत करते हैं। Part-2 राजस्थान का विस्तार :- उत्तर से दक्षिण तक के राज्य की लंबाई 826 किलोमीटर राजस्थान में कोणा गांव ( गंगानगर 30 डिग्री 12 सेकंड उत्तरी अक्षांश पर) से दक्षिण में बोरकुंड गांव (कुशलगढ़ बांसवाड़ा 23 डिग्री 3 सेकंड उत्तरी अक्षांश पर ) तक है  राजस्थान का विस्तार पूर्व से पश्चिम तक राज्य की चौड़ाई 869 किलोमीटर तथा विस्तार पश्चिम में कटरा गांव (सम जैसलमेर 69 डिग्री 30 सेकंड पूर्वी देशांतर पर) से पूर्व में सिलावट गांव के पास 'जगमोहन का पूरा' (राजाखेड़ा धौलपुर 78 डिग्री 17 सेकंड पूर्वी देशांतर पर) तक है 👉 Rajasthan ka bhugol part-1 👈 राजस्थान के भूगोल part-1 के ऑब्जेक्टिव प्रश्न- प्रश्न -1 राजस्थान राज्य के कुल क्षेत्रफल तथा कुल जनसंख्या का लगभग समान प्रतिशत कौन सा जिला रहता है? उत्तर - सिरोही प्रश्न  -2 जैसलमेर राजस...

महिला एवं बाल अपराध राजस्थान पुलिस PDF and notes part-6

महिला एवं बाल अपराध राजस्थान पुलिस PDF and notes part-6 📕बालश्रम   (निषेध एवं नियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के अनुसार बच्चों को दो श्रेणियों में बांटा गया हैः- एक ऐसा व्यक्ति, जिसने 14 वर्ष की आयु पूरी नहीं की हो, 14 वर्ष तक की आयु के किसी भी बच्चे को कहीं भी रोजगार पर नहीं लगाया जा सकता है। एक ऐसा व्यक्ति, जिसने 14 वर्ष की आयु पूरी की हो, लेकिन 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं की हो, ऐसे बालक को किसी भी खतरनाक६ जोखिम वाले व्यवसायों या प्रक्रियाओं में काम पर नहीं लगाया जाना चाहिए और खतरनाक कार्य करने की अनुमति भी नहीं देनी चाहिए ।  बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के धारा (बी) के तहत यदि कोई विवाहित जोड़े में से कोई भी एक नाबालिग है, तो इसे बाल विवाह माना जाता है। 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 से कम उम्र के लड़के को इस अधिनियम के तहत नाबालिग माना गया है। इसका अर्थ है कि विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु लड़की के लिए 18 और लड़के के लिए 21 वर्ष है।  केन्द्र सरकार द्वारा 1929 के बाल विवाह निषेध अधिनियम को निरस्त करके और उसके स्थान पर 2006 में अधिक प्रगतिशील बाल विवाह निषेध अधिनियम लाकर...

rajasthan police ka syllabus,child related crime

मानव तस्करी (रोकथाम, सुरक्षा व  पुनर्वास) बिल, 2018- महिला व बाल विकास मंत्रालय द्वारा 18 जुलाई, 2018 को लोकसभा में यह बिल पेश हुआ जो 26 जुलाई, 2018 को एक सदन में पारित हो गया। एक सदन में पारित इस बिल में सभी तरीकों से तस्करी की जांच करने के लिए और तस्करी पीड़ितों के बचाव, सुरक्षा व पुनर्वास के नियम स्थापित करने का प्रावधान है| बालकों से सम्बंधित अपराध:- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो 2015 -16 के अनुसार भारत में बच्चों के प्रति होने वाले अपराध जैसेय बाल श्रम, बाल व्यापार, अपहरण, शारीरिक-मानसिक हिंसा, यौन शोषण, बलात्कार आदि के मामलों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। ये अपराध घर, स्कूलों, अनाथालयों, आवास-गृहों, सड़क, कार्यस्थल, जेल, सुधार-गृह आदि किसी जगह पर, किसी के भी द्वारा हो सकते हैं। बालकों के साथ अपराध करने वाला, जान-पहचान से लकर अनजान तक कोई भी हो सकता है। बाल संरक्षण के लिए बनाए गए कानून  निम्नलिखित हैं: बालक एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियम) अधिनियम, 1986 -  इस अधिनियम की धारा 3 के तहत 14 वर्ष तक की आयु वर्ग तक के बालक से किसी भी प्रकार का खतर...

महिला एवं बाल अपराध राजस्थान पुलिस PDF and notes

महिला एवं बाल अपराध राजस्थान पुलिस PDF and notes Lesson-4 यदि आप ने lesson-1,2 or 3 नहीं पढ़ा है तो पहले उन्हें पढ़ ले जिनके link last में दिये गये हैं।  📚पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम 1994:- भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगनुपात को रोकने के लिए भारत की संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है। भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से जन्म पूर्व लिंग निर्धारण के प्रति अपना विरोध व्यक्त किया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 01/01/1996 को प्रसव पूर्व निदान तकनीक (विनियमन और दुरूपयोग निवारण) अधिनियम, 1994 लागू कर ऐसी जाँचों को कानूनी अपराध ठहराया है। इस अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत आनुवंशिक सलाह केन्द्रों; आनुवंशिक प्रयोगशालाओं, आनुवंशिक क्लिनिकों, अल्ट्रासाउण्ड क्लिनिकों और इमेजिंग सेन्टरों में जहां गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक से संचालन की व्यवस्था है वहां जन्म पूर्व निदान तकनीकों का उपयोग केवल निम्नलिखित विकारों की पहचान के लिए ही किया जा सकता है:- ↪गुणसूत्र सम्बन्धी विकृति | ↪आनुवंशिक उपापचय रोग | ↪रक्त वर्णिका संबंधी रोग | ↪लिंग संबंधी आनुवंशिक रोग । ↪जन्म...

महिला एवं बाल अपराध राजस्थान पुलिस PDF and notes

महिला एवं बाल अपराध राजस्थान पुलिस PDF and notes Lesson-3 यदि आप ने lesson-1 or 2 नहीं पढ़ा है तो पहले उन्हें पढ़ ले जिनके link last में दिये गये हैं।  📖स्त्रीधन :- शादी के वक्‍त जो उपहार और जेवर को लड़की को दिए जाते हैं, वे स्त्रीधन कहलाते हैं। इसके अलावा लड़के और लड़की दोनों के कॉमन उपयोग के सामान जैसे फर्नीचर, टीवी, आदि स्त्रीधन में आते हैं ।  📖उपहार :- लड़की शादी में जो सामन अपने साथ लेकर आती है या उसके पति को या उसके पति के रिश्तेदारों को दिया जाता है वह उपहार के दायरे में आता है| ➡️ अधिनियम से जुडी प्रमुख धाराएं :- ↪ धारा 2- दहेज का मतलब है कोई सम्पति या बहुमूल्य प्रतिभूति देना या देने के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से | ↪ धारा 3- दहेज लेने या देने का अपराध ↪ धारा 4- दहेज की मांग के लिए जुर्माना ↪ धारा 4ए - किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रकाशन या मिडिया के माध्यम से पुत्र-पुत्री के शादी के एवज में व्यवसाय या सम्पत्ति या हिस्से का कोई प्रस्ताव | ↪ धारा 6 - कोई दहेज विवाहिता के अतिरिक्त अन्य किसी व्यक्ति द्वारा धारण किया जाना | ↪ धारा 8ए - घटना से एक वर्ष के अन्दर शिकाय...
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now