हेमू कालाणी आज भी हैं युवा वर्ग के हैं लिए आदर्श Contents [ hide ] हेमू कालाणी बचपन से ही साहसी थे। उनके आदर्श सरदार भगत सिंह थे। कविता शर्मा छबलानी उन स्वतंत्रता सेनानियों को याद करना भी जरूरी है, जिनकी वजह है से हम आज आजादी की सांस ले रहे हैं। ऐसे ही नायकों में एक थे हेमू कालाणी। अविभाजित भारत के सिंध प्रांत के सक्खर में 23 मार्च, 1923 को सिंधी परिवार में पेसूमल कालाणी और जेठी बाई के आंगन में जन्म लेने वाले बालक हेमू कालाणी के आदर्श सरदार भगत सिंह थे। हेमू बचपन से ही साहसी थे। स्कूल जाने के साथ ही वे क्रांतिकारी गतिविधियों में भी सक्रिय होकर अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाने लगे। वे मात्र 7 वर्ष की उम्र में तिरंगा हाथ में थाम कर अंग्रेजों की बस्ती में चले जाते थे और अपने मित्रों के साथ निर्भीक सभाएं करते थे। वे पढ़ाई-लिखाई में कुशल होने के अलावा अच्छे तैराक तथा धावक भी थे। राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम मे हेमू कालाणी का योगदान उन दिनों 'स्वराज मंडल' नामक गुप्त संस्था की बड़ी भूमिका थी, जिसके सूत्रधार डॉ. मघाराम कालाणी थी। इस संस्था का उद्देश्य भारत में ब्रिटिश...
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