अँगुली के पर्यायवाची शब्द
अँगुली (Finger) - हाथ का सूक्ष्म लेकिन अत्यंत उपयोगी अंग
अँगुली का हिन्दी में अर्थ
अँगुली (उँगली) मानव हाथ के अगले भाग की वह संरचना है जो पाँच संख्या में होती है – अंगूठा, तर्जनी (सूची), मध्यमा, अनामिका और कनिष्ठा। यह स्पर्श, पकड़, लिखने, इशारा करने और संवेदनशील कार्यों के लिए अपरिहार्य है। अँगुलियों के सिरों पर स्पर्श-संवेदी रिसेप्टर्स होते हैं, जो उन्हें अत्यधिक संवेदनशील बनाते हैं।
संस्कृत में 'अङ्गुलि' शब्द का प्रयोग किया जाता है। हर अँगुली के अलग-अलग नाम हैं, और साहित्य में 'करशाखा' (हाथ की डाली), 'बालाग्र', 'नखांकुर' जैसे सुंदर पर्याय मिलते हैं। अँगुली का उपयोग गिनती करने के कारण माप की इकाई (अंगुल) बन गया था।
अँगुली का वाक्य में प्रयोग
उसने अपनी अँगुली से बालू पर एक नाम लिख दिया।
अँगुली का अंग्रेजी में अर्थ
Finger (A slender, jointed digit of the hand used for grasping and touching)
अँगुली के पर्यायवाची शब्द (8 शब्द)
1. अंगुलि (अँगुलि)
संस्कृत का प्राचीन एवं प्रमुख नाम
2. अंगुलिका (अँगुलिका)
अंगुलि का लघु रूप (छोटी अँगुली)
3. उँगली
हिन्दी का सबसे प्रचलित व्यवहारिक रूप
4. दीधिति
किरण के समान सूक्ष्म एवं चमकीली
5. करशाखा
हाथ की शाखा (डाली)
6. शक्वरी
वैदिक नाम, शक्ति या सामर्थ्य वाली
7. करांगुलि
हाथ की अँगुली (कर+अंगुलि)
8. बालाग्र
बाल के अग्र भाग के समान सूक्ष्म (रूपक)
पर्यायवाची शब्दों का विस्तृत अर्थ
अंगुलि (अँगुलि) का अर्थ
"अंगुलि" संस्कृत का सबसे प्राचीन एवं मूल शब्द है। इसकी व्युत्पत्ति 'अंग्' (गति करना, हिलना) या 'अम्ल' (सूक्ष्म) धातु से मानी जाती है। यह शब्द अँगूठे को छोड़कर शेष चार अँगुलियों के लिए भी विशेष रूप से प्रयुक्त होता था। वैदिक साहित्य में अंगुलि का उल्लेख यज्ञ-क्रियाओं और मुद्राओं के संदर्भ में मिलता है।
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| अँगुली (उँगली) |
अंगुलिका (अँगुलिका) का अर्थ
"अंगुलिका" 'अंगुलि' का लघु प्रत्ययांत रूप है – यानि छोटी अँगुली या कनिष्ठिका। इस शब्द का प्रयोग विशेष रूप से कनिष्ठा (सबसे छोटी) अँगुली के लिए होता था। बाद में यह किसी भी अँगुली के लिए प्रेमपूर्ण या लघु रूप में प्रयुक्त होने लगा। अंगुलिका का प्रयोग अलंकार (अंगुलिका मुद्रिका) में भी हुआ है।
उँगली का अर्थ
"उँगली" हिन्दी भाषा का सबसे अधिक प्रचलित और व्यवहारिक रूप है। यह संस्कृत 'अंगुलि' का अपभ्रंश है (प्राकृत 'उंगुलि' से होता हुआ)। हिन्दी के अधिकांश क्षेत्रीय रूपों में यही शब्द मानक है। मुहावरों में 'उँगली उठाना', 'उँगली पर नचाना', 'उँगलियाँ तोड़ना' आदि अत्यन्त लोकप्रिय हैं।
दीधिति का अर्थ
"दीधिति" मूलतः 'दीप्ति' (चमक, किरण) का पर्याय है। परंतु शरीररचना के संदर्भ में यह अँगुली के लिए काव्यात्मक नाम के रूप में प्रयुक्त हुआ है – क्योंकि अँगुलियाँ सूक्ष्म, कोमल और चमकदार होती हैं, जैसे किरणें। संस्कृत कोशों में 'दीधिति' को अंगुलि का एक रूपक पर्याय माना गया है।
शक्वरी का अर्थ
"शक्वरी" एक वैदिक शब्द है। इसकी व्युत्पत्ति 'शक्' (शक्ति, सामर्थ्य) धातु से है – अर्थात जिसमें शक्ति हो। ऋग्वेद में शक्वरी नामक एक देवी और एक छंद का भी उल्लेख है। बाद के साहित्य में शक्वरी को अँगुली का पर्याय मान लिया गया, संभवतः अँगुलियों के कार्य-सामर्थ्य (पकड़ने, बनाने, इंगित करने) के कारण।
करशाखा का अर्थ
"करशाखा" – कर (हाथ) + शाखा (डाली) – अर्थात हाथ की डालियाँ। यह अत्यंत सटीक और सुंदर रूपक है। जैसे वृक्ष की शाखाएँ फैलती हैं, वैसे ही हाथ से अँगुलियाँ निकलती हैं। इस शब्द का प्रयोग शास्त्रीय संगीत (तानपुरा बजाने वाली अँगुलियाँ) और नृत्य की मुद्राओं में भी होता है।
करांगुलि का अर्थ
"करांगुलि" भी कर (हाथ) + अंगुलि से बना है, जो 'अंगुलि' का ही एक स्पष्ट रूप है। यह शब्द पाणिनीय व्याकरण में 'कर्मधारय समास' का उदाहरण है। इसका प्रयोग उन जगहों पर अधिक होता है जहाँ हाथ की अँगुली पर विशेष ज़ोर देना हो, जबकि पैर की अँगुली से अंतर स्पष्ट किया जाता है (पादांगुलि या चरणांगुलि)।
बालाग्र का अर्थ
"बालाग्र" – बाल (बाल) + अग्र (सिरा) – बाल के अग्र भाग के समान सूक्ष्म। अँगुली के अग्रभाग (नाखून के पास का भाग) बहुत संवेदनशील होता है और बाल की नोक के समान बारीक कार्य कर सकता है। इस नाम का प्रयोग काव्य में अंगुली की सूक्ष्मता और स्पर्श-क्षमता को उभारने के लिए किया जाता है।
अँगुली के पर्यायवाची नाम से जुड़े सवाल-जवाब (FAQ)
Q1. 'अँगुली' शब्द की व्युत्पत्ति क्या है?
हिन्दी की 'उँगली'/ 'अँगुली' संस्कृत के 'अंगुलि' से बनी है। अंगुलि की व्युत्पत्ति 'अंग्' (हिलना) या 'अंज्' (व्याप्त करना, चिकनाई देना) धातु से मानी जाती है। अँगुलियाँ सदा गतिशील और स्पर्श-स्निग्ध होती हैं, इसलिए यह नाम उपयुक्त है।
Q2. 'शक्वरी' क्या केवल अँगुली का नाम है?
शक्वरी का मूल अर्थ 'शक्तिशाली स्त्री' या 'छंद विशेष' है। वैदिक काल में यह एक देवी का नाम भी था। बाद के कोशों में इसे अँगुली का पर्याय मान लिया गया। हालाँकि, यह अत्यंत प्राचीन एवं दुर्लभ शब्द है, सामान्य साहित्य में कम प्रयुक्त।
Q3. पाँचों अँगुलियों के अलग-अलग नाम क्या हैं?
संस्कृत/हिन्दी में: अंगूठा (प्रथमांगुलि/कनिष्ठिका के ऊपर – वास्तव में 'अंगुष्ठ'), तर्जनी (तर्जनी या सूची – दिखाने वाली), मध्यमा (बीच वाली), अनामिका (अनामिका – बिना नाम की), कनिष्ठिका (सबसे छोटी)।
Q4. 'दीधिति' शब्द का क्या संबंध है?
'दीधिति' मूलतः 'दीप्ति' का ही रूप है – चमक, किरण। अँगुलियों के लिए यह नाम उनकी सूक्ष्मता, कोमलता और चमकदार नाखूनों के कारण रूपक के रूप में प्रयुक्त हुआ। संस्कृत काव्य में नायिका की अँगुलियों की तुलना चाँदनी की किरणों से की गई है – 'दीधिति' शब्द वहीं से आया है।

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