दाँत के पर्यायवाची शब्द
दाँत (Tooth) - भोजन चबाने, मुस्कान और वाणी का आधार
दाँत का हिन्दी में अर्थ
दाँत मनुष्य और अधिकांश कशेरुकी प्राणियों के जबड़ों में स्थित कैल्शियम युक्त कठोर रचनाएँ हैं, जो भोजन को चबाने (ग्रासन), काटने और पीसने का कार्य करती हैं। मनुष्य के जीवनकाल में दो बार दाँत आते हैं – दूध के दाँत (बचपन) और स्थायी दाँत (तीस दाँत – चार ज्ञान दाँत समेत 32)। दाँतों की सफ़ाई, क्षय रोग (कैविटी) और मसूड़ों का स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संस्कृत साहित्य में दाँतों के लिए 'दंत', 'रद', 'दशन', 'रदन' आदि शब्द प्रचलित हैं। 'द्विज' का अर्थ दाँत इसलिए है क्योंकि यह दो बार जन्म लेते हैं – दूध के दाँत और स्थायी दाँत। दाँतों की सुंदरता मुस्कान का श्रृंगार मानी गई है।
दाँत का वाक्य में प्रयोग
साफ़ और मजबूत दाँत व्यक्ति के आत्मविश्वास और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक होते हैं।
दाँत का अंग्रेजी में अर्थ
Tooth (A hard, calcified structure in the jaws, used for biting and chewing)
दाँत के पर्यायवाची शब्द (8 शब्द)
1. दंत
संस्कृत का सर्वाधिक प्रचलित नाम
2. दाँत
हिन्दी का सबसे सामान्य व्यवहारिक नाम
3. द्विज
दो बार जन्म लेने वाले (दूध के और स्थायी)
4. रद
दाँत जो भोजन को रौंदें/चबाएँ
5. रदन
रद शब्द का विस्तार, दाँतों का समूह
6. दशन
काटने/दंश करने वाले दाँत
7. दंतुर
दाँतों से युक्त (विशेषण – पर्यायवाची के रूप में)
8. हनुदंती
जबड़े में स्थित दाँत (शास्त्रीय पर्याय)
पर्यायवाची शब्दों का विस्तृत अर्थ
दंत का अर्थ
"दंत" (दन्तः) संस्कृत का मूल एवं सबसे प्रचलित शब्द है। इसकी व्युत्पत्ति 'दम्' (दबाना, वश में करना) से मानी जाती है, क्योंकि दाँत भोजन को दबाते/पीसते हैं। वैदिक साहित्य से लेकर आधुनिक चिकित्सा तक 'दंत' शब्द व्याप्त है – 'दंत चिकित्सा', 'दंत मंजन', 'दंतावली' (दाँतों की पंक्ति)। दंतों को आयुर्वेद में 'दन्त धातु' कहा गया है।
दाँत का अर्थ
"दाँत" हिन्दी का अत्यन्त सामान्य व्यवहारिक शब्द है, जो संस्कृत 'दंत' का ही अपभ्रंश रूप है। हिन्दी मुहावरों में दाँत बहुत आते हैं – 'दाँत किटकिटाना', 'दाँतों तले उँगली दबाना', 'दाँत खट्टे करना', 'दाँत तोड़ जवाब देना', 'दाँतों में घास दबाना' (हार मानना) आदि। दाँतों का गिरना, टूटना या सफ़ेद होना – सभी के अपने सांस्कृतिक अर्थ हैं।
द्विज का अर्थ
"द्विज" (द्विजः) का शाब्दिक अर्थ है 'दो बार जन्म लेने वाला'। दाँत इसलिए द्विज कहलाते हैं क्योंकि मनुष्य के जीवन में दो बार दाँत निकलते हैं – प्रथम बाल्यावस्था में दूध के दाँत (क्षीरदंत), द्वितीय बाल्यावस्था के बाद स्थायी दाँत। यह नाम अत्यंत तार्किक है। इसी शब्द का प्रयोग ब्राह्मण, पक्षी और चंद्रमा के लिए भी होता है (जो दो बार जन्म लेते हैं / कलाएँ बढ़ाते हैं)।
रद का अर्थ
"रद" (रदः) – 'रद' धातु (रद = चबाना, कुचलना) से व्युत्पन्न। इसका अर्थ है जो भोजन को रौंदे या चबाए। संस्कृत में 'रद' शब्द दाँत के लिए प्रयुक्त होता है, विशेषकर बड़े दाँत (चर्वक) या कृत्रिम दाँत के लिए भी। 'रदच्छद' (दाँत की कतार), 'रदमूल' (जड़) आदि प्रयोग मिलते हैं। यह 'दंत' की तुलना में कम प्रचलित है किंतु शास्त्रीय कोशों में पर्याय माना गया है।
रदन का अर्थ
"रदन" (रदनम्) 'रद' का ही विस्तारित रूप है, प्रायः रद के समान अर्थ में। कुछ कोशों में 'रदन' का प्रयोग दाँतों के समूह या हाथी के दाँत (दंत/हस्तिदंत) के लिए भी होता है। संस्कृत काव्य में 'रदनच्छद' (होंठ), 'रदनचारु' (सुंदर दाँत) प्रयोग मिलते हैं। यह शब्द 'द्विज' और 'दशन' की तुलना में कम प्रचलित है, पर व्याकरणिक दृष्टि से मान्य है।
दशन का अर्थ
"दशन" (दशनम्) – 'दश' (दंश, काटना) से व्युत्पन्न, अर्थात जो काटे। यह शब्द तीक्ष्ण दाँत, विशेषकर कृत्रिम या हिंस्र दाँत के लिए आता है। रामायण-महाभारत में 'दशन' का प्रयोग राक्षसों के दाँतों के लिए हुआ है। सामान्य दाँतों के लिए भी यह पर्याय चलता है। आधुनिक हिन्दी में 'दशन' का प्रयोग अत्यन्त कम है, पर संस्कृत के अध्ययन में आवश्यक है।
दंतुर का अर्थ
"दंतुर" (दन्तुरः) मूलतः एक विशेषण है जिसका अर्थ है 'दाँतों से युक्त' या 'दांतेदार'। परंतु कई संस्कृत कोशों में इसे दाँत का पर्यायवाची भी माना गया है (संज्ञा के रूप में)। इसका प्रयोग दाँत, दंतपंक्ति, या वस्तु के 'दंतुर किनारे' (दाँतेदार किनारा) के लिए होता है। दंतुर शब्द दाँत के सामूहिक या गुणवाचक अर्थ में प्रयुक्त हो सकता है।
हनुदंती का अर्थ
"हनुदंती" – हनु (जबड़ा) + दंती (दाँत) – शाब्दिक अर्थ 'जबड़े में स्थित दाँत'। यह एक कृत्रिम एवं अत्यंत शास्त्रीय शब्द है, जो पाणिनीय व्याकरण में उदाहरणस्वरूप मिलता है। आम व्यवहार में यह शब्द प्रयुक्त नहीं होता, किंतु शरीर रचना के संदर्भ में इसका उल्लेख मिल सकता है। यहाँ पर्यायों की सूची को पूरा करने के लिए दिया गया है।
दाँत के पर्यायवाची नाम से जुड़े सवाल-जवाब (FAQ)
Q1. दाँतों को 'द्विज' क्यों कहते हैं?
'द्विज' का अर्थ है 'दो बार जन्म लेने वाला'। मनुष्य के दाँत दो बार निकलते हैं – पहले दूध के दाँत (बचपन), फिर वे गिरकर स्थायी दाँत आते हैं। अतः दाँत 'दो बार जन्म' लेते हैं। इसी कारण यह नाम पड़ा। यही नाम ब्राह्मण, पक्षी और चंद्रमा के लिए भी प्रयुक्त होता है (प्रत्येक के अपने कारण हैं)।
Q2. 'रद', 'रदन' और 'दशन' में क्या अंतर है?
तीनों का मूल क्रियात्मक है – 'रद' चबाने पर, 'दशन' काटने पर केंद्रित है। 'रदन' 'रद' का ही विस्तारित रूप है। व्यावहारिक रूप से तीनों पर्यायवाची माने जाते हैं, किंतु 'रद' का प्रयोग अधिक शास्त्रीय, 'दशन' तीक्ष्ण दाँतों के लिए विशिष्ट है।
Q3. क्या 'दंतुर' सीधे दाँत का नाम है?
'दंतुर' मूलतः विशेषण है – 'दाँतों वाला' या 'दांतेदार'। किंतु कई कोशकारों ने इसे संज्ञा के रूप में 'दाँत' का पर्याय मान लिया है, विशेषतः जब दाँतों के समूह या दाँत की आकृति की बात हो। सामान्य प्रयोग में इसका प्रयोग दाँत के लिए अत्यंत दुर्लभ है।
Q4. 'हनुदंती' शब्द का प्रयोग कहाँ मिलता है?
'हनुदंती' अत्यंत शास्त्रीय, लगभग अप्रचलित शब्द है। यह पाणिनीय व्याकरण में उदाहरण के रूप में आता है। आधुनिक संस्कृत या हिन्दी में इसका प्रयोग नहीं के बराबर है। यदि कोई शारीरिक रचना का विस्तृत विवरण दे रहा हो, तो वहाँ 'हनुदंती' से 'जबड़े के दाँत' अभिप्रेत हो सकते हैं।
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