कटि(kati) के मुख्य पर्यायवाची शब्द कमर, लंक, कटिभाग, और मध्यांग kamar paryayvachi shabad

कटि का पर्यायवाची शब्द क्या होगा? कटी के पर्यायवाची शब्द | Synonyms of katii, kati paryayvachi shabad, hip paryayvachi shabad, kamar paryayvachi shab
Studyquake

कटि के पर्यायवाची शब्द

कटि (Waist/Hip) - शरीर का सुन्दर मध्य भाग, लचीलापन और संतुलन का आधार

कटि का हिन्दी में अर्थ

कटि (कमर) मानव शरीर का वह भाग है जो वक्ष और उदर को नितम्बों से जोड़ता है। यह शरीर का सबसे संकीर्ण प्राकृतिक बिंदु होता है, जो रीढ़ की हड्डी के तल पर स्थित होता है। कटि शरीर को लचीलापन, झुकने-मुड़ने की क्षमता और स्थिरता प्रदान करती है। नारी सौंदर्य में कटि का विशेष स्थान है – 'कटि का कमनीय वलन' (टेढ़ापन) अत्यंत सराहा गया है।

संस्कृत साहित्य में 'कटि', 'श्रोणि', 'मध्य', 'नितम्ब' आदि अनेक शब्द मिलते हैं। कटि क्षेत्र में मेखला (करधनी) पहनी जाती है। शास्त्रों में कटि को 'मूलाधार' का निकटवर्ती माना गया है। नृत्य और योग में कटि का संचालन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कटि का वाक्य में प्रयोग

नर्तकी ने अपनी कटि पर घूँघरू बाँधे और लयबद्ध तरीके से झुमने लगी।

कटि का अंग्रेजी में अर्थ

Waist / Hip (The narrow part of the body between the ribs and the hips)

कटि के पर्यायवाची शब्द (8 शब्द)

1. कटि

संस्कृत का मूल एवं प्रचलित नाम

2. कमर

हिन्दी का सबसे सामान्य व्यवहारिक नाम

3. श्रोणि

कटि एवं नितम्ब क्षेत्र (कूल्हा)

4. लंक

प्राचीन शब्द, कमर या नितम्ब

5. मध्यांग

शरीर का मध्य भाग (मध्य+अंग)

6. मध्य

कमर का नाम (विशेषतः काव्य में)

7. तनुमध्य

कृश (पतली) कमर, स्त्री सौंदर्य का सूचक

8. नितम्ब

कमर के नीचे का उत्तल भाग (हिप)

पर्यायवाची शब्दों का विस्तृत अर्थ

कटि का अर्थ

"कटि" (स्त्रीलिंग, कटिः) संस्कृत का आधार शब्द है। इसकी व्युत्पत्ति 'कट्' (गति, प्रसार) या 'कत' (बँटवारा) धातु से मानी जाती है। कटि शरीर के ऊपरी और निचले भागों को अलग करती है। पुराणों और काव्यों में 'कटिप्रोथ' (कमर का विस्तार), 'कटिवासस्' (करधनी) आदि शब्द मिलते हैं। कटि को 'मेखलाधार' भी कहा जाता है।

कटि - कमर क्षेत्र
कटि – शरीर का संतुलन केंद्र (स्रोत: AI जनरेटेड)

कमर का अर्थ

"कमर" हिन्दी का अत्यन्त प्रचलित शब्द है, जिसका मूल संस्कृत 'कटि' (प्राकृत 'कम') से बना है। यह शब्द रोज़मर्रा की बातचीत, कपड़ों (कमरबंद, कमरिया), रोगों (कमर दर्द) और लोकगीतों में भरपूर प्रयुक्त होता है। हिन्दी मुहावरे – 'कमर कसना' (तैयार होना), 'कमर टूटना' (शक्ति क्षीण होना), 'कमर निकलना' (उबरना आदि) – अत्यंत सजीव हैं।

श्रोणि का अर्थ

"श्रोणि" (श्रोणिः) संस्कृत का प्राचीन शब्द है, जो कटि और नितम्ब सहित पूरे कूल्हे (पेल्विस) के क्षेत्र को दर्शाता है। आयुर्वेद में श्रोणि अस्थि (pelvic bone) और श्रोणिचक्र का उल्लेख है। काव्य में 'श्रोणिबिम्ब' (नितम्बों का वृत्ताकार सौंदर्य) और 'श्रोणीसूत्र' (करधनी) शब्द मिलते हैं। यह नारी सौंदर्य का एक प्रिय अंग है – 'विशाल श्रोणि' स्त्रीत्व का प्रतीक मानी गई है।

लंक का अर्थ

"लंक" (दे. 'लङ्का' से भिन्न) एक अल्पप्रचलित पर्याय है, जिसका अर्थ 'कमर' या 'नितम्ब' होता है। यह शब्द प्राकृत और अपभ्रंश कोशों में मिलता है। संभवतः 'लङ्क' धातु से (आच्छादन या उन्नयन) बना है। हालाँकि आधुनिक हिन्दी में यह दुर्लभ है, पर व्याकरणिक रुचि और प्राचीन साहित्य के संदर्भ में इसे जानना उपयोगी है।

मध्यांग का अर्थ

"मध्यांग" – मध्य (बीच) + अंग (शरीर का भाग) – अर्थात शरीर का मध्य अंग। यह शब्द कटि-प्रदेश के लिए प्रयुक्त होता है। योग एवं आयुर्वेद में 'मध्यांग' शब्द का प्रयोग कभी-कभी 'कटि' के स्थान पर होता है। यह नाम शरीर रचना की दृष्टि से अत्यन्त सटीक है, क्योंकि कमर ही शरीर को दो समान भागों में बाँटती है।

मध्य का अर्थ

"मध्य" शब्द सामान्यतः 'बीच' के अर्थ में प्रसिद्ध है, परन्तु शरीर के संदर्भ में 'मध्य' का अर्थ 'कमर' या 'उदर से नीचे का भाग' हो जाता है। संस्कृत काव्य में 'मध्यक्षीणा' (पतली कमर वाली स्त्री) और 'मध्यदेश' प्रयुक्त हुए हैं। मध्य शब्द में कटि के सौन्दर्य और लालित्य का गुण समाया है।

तनुमध्य का अर्थ

"तनुमध्य" – तनु (पतला, कृश) + मध्य (कमर) – अर्थात पतली कमर। यह स्त्री सौन्दर्य का अभिन्न अंग है। श्रीमद्भागवत और कालिदास के साहित्य में 'तनुमध्यमा' (पतली कमर वाली नायिका) का सुंदर चित्रण मिलता है। यह शब्द किसी विशेष गुण का द्योतक है, किन्तु काव्य में अक्सर कमर के स्थान पर 'तनुमध्य' ही प्रयुक्त हो जाता है।

नितम्ब का अर्थ

"नितम्ब" (नितम्बः) शरीर का कटि के नीचे का उत्तल गोल भाग है, जिसे हिप या नितम्ब कहते हैं। यह 'श्रोणि' का ही एक अंश है। नितम्ब को सीट बोन (पेल्विस) भी कह सकते हैं। काव्य में 'नील नितम्ब' (नीले-श्याम नितम्ब, मेघ के लिए रूपक), 'नितम्बिनी' (स्त्री) आदि प्रयोग होते हैं। यद्यपि वैधानिक रूप से नितम्ब और कटि थोड़े भिन्न हैं, अनेक कोश इन्हें पर्याय मानते हैं।

कटि के पर्यायवाची नाम से जुड़े सवाल-जवाब (FAQ)

Q1. 'कटि', 'श्रोणि' और 'नितम्ब' में क्या अंतर है?

'कटि' संकीर्ण कमर क्षेत्र है। 'श्रोणि' पूरा कूल्हा क्षेत्र (पेल्विस) है, जो कटि और नितम्ब को मिलाकर बनता है। 'नितम्ब' विशेषकर पिछले उभरे मांसपेशीय भाग (हिप) को कहते हैं। साहित्य में इन तीनों का प्रयोग अक्सर एक-दूसरे के स्थान पर हो जाता है, किंतु शारीरिक रचना में भिन्नताएँ हैं।

Q2. 'लंक' शब्द कहाँ प्रचलित है?

'लंक' अब अप्रचलित है। यह प्राकृत एवं पुरानी हिन्दी (अपभ्रंश) में मिलता था। इसका एक प्रयोग जैन साहित्य में भी है। 'लंक' का संस्कृत रूप 'लङ्का' नहीं है; यह भिन्न शब्द है। अतः यह शब्द अभिलेखीय और व्याकरणिक ग्रंथों में ही अधिक दिखता है।

Q3. 'मध्यांग' और 'मध्य' में भिन्नता क्या है?

'मध्यांग' शरीर का वह अंग है जो बिल्कुल मध्य में हो – कटि। 'मध्य' सिर्फ 'बीच' के अर्थ में सामान्य है, परंतु शरीर के संदर्भ में यह भी कटि का ही अर्थ देता है। जैसे 'मेखला मध्ये' (कमर में करधनी) – यहाँ 'मध्य' का अर्थ कटि ही है।

Q4. काव्य में 'तनुमध्य' का कैसे प्रयोग हुआ है?

'तनुमध्य' या 'तनुमध्यमा' (पतली कमर वाली) श्रृंगार रस की अभिन्न छवि है। कालिदास के 'शकुंतला' तथा 'कुमारसम्भव' में नायिकाओं की कृश कटि की प्रशंसा मिलती है। भवभूति के नाटकों में 'तनुमध्य' वाली नायिका ही प्रेम की पात्र होती है। यह शब्द स्त्री सौंदर्य के आदर्श को दर्शाता है।

Post a Comment

Content kesa laga jarur comment kre