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पिछली पोस्ट में हमने कृषि प्रबंधन के topic को Reet syllabus के अनुसार तैयार कर रहे है, तो आज कृषि प्रबंधन में कृषि पद्धति या खेती के चरण के बारे में पड़ेंगे तो पोस्ट को पूरा पढ़ें साथ ही अगर आपने कृषि प्रबंधन पार्ट - 1 और part - 2 नहीं पढ़ा है तो उसका लिंक नीचे दिया गया है तो उसे जरूर पढ़ें तो शुरुआत करते हैं -
Part - 3
सिंचाई करना
खेत में फसल के उगने एवं खाद मिलाने के पश्चात् किसान क्या करता है?
किसान फसल को पानी पिलाता है। जिस प्रकार हमें भोजन के साथ जल की आवश्यकता होती है उसी प्रकार फसल को भी वृद्धि एवं फलित होने के लिए जल की आवश्यकता होती है। कई प्रकार के कृत्रिम साधनों द्वारा समय-समय पर फसल को जल की आवश्यकता की पूर्ति करना सिंचाई कहलाता है।
सिंचाई (sichai) से फसल को लाभ
- बीज अंकुरण के लिए ।
- वाष्पोत्सर्जन क्रिया हेतु पत्तियों को जल की आपूर्ति करना ।
- जल के द्वारा विभिन्न पोषक तत्त्व पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचते हैं ।
- पौधे की वृद्धि एवं विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका ।
सिंचाई हेतु जल के स्रोत
- नदी,
- तालाब,
- कुआँ,
- हैण्डपम्प,
- नहरें,
- बाँध
आदि जल स्रोतों का उपयोग सिंचाई के लिए करता है ।
सिंचाई (sichai) के साधन
सिंचाई के कई साधनों द्वारा किसान फसलों की जल आपूर्ति करते हैं ये साधन कौन-कौन से हो सकते हैं? आइए, जाने- हम सिंचाई के विभिन्न साधन काम में लेते हैं ।
सिंचाई के प्रकार
- पारम्परिक साधन
- आधुनिक साधन
हमने ऊपर चित्रों में सिंचाई के विभिन्न साधन देखें। इनसे सिंचाई कैसे होती है बताइए? आजकल नलकूप, विद्युत या डीजल पम्प आदि से सिंचाई की जाती है । ऐसा क्यों? परम्परागत साधनों की तुलना में आधुनिक साधनों से कम समय में अधिक सिंचाई हो जाती है। इनसे जल का उपयोग मितव्ययता से कर सकते हैं ।
सिंचाई की आधुनिक विधियों को निम्न चित्रों द्वारा समझ सकते हैं -
- सिंचाई (sichai) की आधुनिक विधियाँ
- छिड़काव (छिड़क कर ऊपर से)
- ड्रिप तन्त्र (बूंद-बूंद सिंचाई जड़ों में)
फसल की सुरक्षा करना
phasal meaning in hindi - फसल, उपज, पैदावार, फसल काटना, सस्य
phasal meaning in english - crop, harvest, kirn.
ऐसा मानते हैं कि किसान फसल पकने पर उसे काटकर खेत से घर सुरक्षित ले आये तब उसकी मेहनत सफल होती है । परन्तु यह आसान प्रक्रम नहीं है, इस अवधि में किसान को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है । ये समस्याएँ क्या-क्या हो सकती है?आप इन समस्याओं की एक सूची तैयार कर सकते है
समस्या की पहचान -
बचाव के तरीके -
1. खरपतवार
समस्या की पहचान -
- फसल के साथ उगने वाले अनावश्यक पौधे जो आवश्यक पोषक तत्त्व पौधे तक नहीं पहुँचने देते हैं।
बचाव के तरीके -
- निनाण करना ।
2. प्राकृतिक प्रकोप
समस्या की पहचान -
- बाढ़,
- सूखा,
- सर्दी,
- आग
बचाव के तरीके -
- समय पर निराई- गुड़ाई करना ।
- खरपतवारनाशी का उपयोग करना।
3. कीट या फफूंद जीवाणुओं व वायरस द्वारा होने वाला रोग
समस्या की पहचान -
- पत्तियों का कटना, तनों का सूखना, फल खराब होना ।
- उत्पादन में कमी
बचाव के तरीके -
- जल निकासी बनाना ।
- सूखा पड़ने पर सिंचाई करना ।
- आग से सुरक्षा के उपाय तैयार रखना ।
4. जानवर
समस्या की पहचान -
- फसल को नुकसान पहुँचाना
- जानवर।
बचाव के तरीके -
- कीट, जीवाणु एवं फफूंद नाशकों का छिड़काव करना |
- बाड़ लगाना, सुरक्षा करना।
फसल काटना
आपने खेतों में फसल कटते हुए देखा होगा । फसल कब काटी जाती है?
फसल के पक जाने पर किसान फसल को काटता है, जिसे फसल की कटाई कहते हैं । फसल के पक जाने पर इसे या तो जड़ से उखाड़ा जाता है या कुछ को मिट्टी के पास से काटा जाता है । फसल को पुराने समय में दर्रते से काटा जाता था ।
आज भी कहीं-कहीं फसल कटाई हेतु इसका उपयोग किया जाता है | अधिकांश किसान आजकल हार्वेस्टर मशीन को फसल कटाई हेतु उपयोग में लेते हैं ।
फसल के पक जाने पर किसान फसल को काटता है, जिसे फसल की कटाई कहते हैं । फसल के पक जाने पर इसे या तो जड़ से उखाड़ा जाता है या कुछ को मिट्टी के पास से काटा जाता है । फसल को पुराने समय में दर्रते से काटा जाता था ।
आज भी कहीं-कहीं फसल कटाई हेतु इसका उपयोग किया जाता है | अधिकांश किसान आजकल हार्वेस्टर मशीन को फसल कटाई हेतु उपयोग में लेते हैं ।
थ्रेशिंग
फसल की कटाई के बाद इसकी नमी दूर करने के लिए कुछ दिन इसे सुखाते हैं । इसके बाद बीज के दानों को भूसे से अलग करते है इसे थ्रेशिंग कहते हैं ।
- छोटे खेत वाले किसान अनाज के दानों को हवा में पटक कर अलग कर लेते हैं, अनाज के दाने भारी होने से पास ही नीचे गिरते रहते हैं और भूसा (चारा) उड़कर दूर इकट्ठा हो जाता है।
- बड़े खेतों वाले किसान काम्बाईन मशीन (थ्रेशर) से फटकने का कार्य करते है जो शीघ्रता से हो जाता है।
अनाज (anaaj) का भण्डारण करना
anaaj meaning - Grain (अनाज)
थ्रेशिंग कार्य के बाद अनाज (anaaj) को बोरियों में भरकर किसान घर ले आता है एवं चारा पशुओं के खाने के लिए इकट्ठा कर लेता है घर लाए गए अनाज का किसान भण्डारण करता है । आवश्यकतानुसार घर रख लेता है बाकी मण्डी में बेच आता है । घर में रखे गए अनाज की सुरक्षा भी महत्त्वपूर्ण है । अनेक उपायों द्वारा भण्डारित अनाज को नमी, कीट, चूहे, सूक्ष्मजीवों से सुरक्षित रखा जाता है । अधिक अनाज के भण्डारण हेतु मण्डियों में भण्डार गृह होते हैं जिन्हें साईलो कहते हैं ।
आज आपने क्या सीखा
कृषि पद्धतियाँ (खेती के चरण)
- सिंचाई (sichai) करना
- फसल की सुरक्षा करना
- फसल काटना
- अनाज (anaaj) का भण्डारण करना
आदि के बारें में पढ़ा ।
Important FAQ. -
Q.1 फास्ट फूड ने अमेरिका में किस समस्या को महामारी के स्तर तक फैला दिया है?
Ans. फास्ट फूड से अमेरिका के नागरिक में मोटापे व तनाव की समस्या महामारी का रूप ले लिया है।
Q.2 basi aur uchchhisht bhojan ka arth h.
(बासी और उच्छिष्ट भोजन का अर्थ क्या है ?)
Ans. बासी और उच्छिष्ट भोजन का अर्थ है बचाव हुआ भोजन जो खानें योग्य नही है। तो हम कह सकते है की वह भोजन जिस में विटामिन, प्रोटीन आदि का न होना ।
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