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राजस्थान में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें - कृषि प्रबंधन for reet

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पिछली पोस्टों में हमने कृषि प्रबंधन के topic को 

Reet syllabus  के अनुसार तैयार कर रहे है, तो 

आज हम कृषि प्रबंधन में राजस्थान में उगाई जाने 

वाली प्रमुख फसलें के बारे में पड़ेंगे तो पोस्ट को 

पूरा पढ़ें साथ ही अगर आपने कृषि प्रबंधन पार्ट - 1 

और part - 2, part - 3  नहीं पढ़ा है तो उसका 

लिंक नीचे दिया गया है तो उसे जरूर पढ़ें तो शुरुआत

 करते हैं -


राजस्थान में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें


 Part - 4 


राजस्थान के विभिन्‍न जिलों में उगाई 

जाने वाली प्रमुख फसलें 


क्र.म. फसल प्रमुख उत्पादक जिले 
1 बाजार  अलवर, जयपुर, नागौर, जोधपुर सीकर, बाड़मेर 
2 मक्का चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा, बाँसवाड़ा, राजसमंद 
3 ज्वार अजमेर, पाली, टोंक, भरतपुर, अलवर 
4 चावल  हनुमानगढ़, बूंदी, कोटा, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा 
5 गेहू  श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर, भरतपुर, बूंदी 
6 जौ जयपुर, हनुमानगढ़, श्री गंगानगर, अलवर, सीकर 
7 मोठ चुरू, बीकानेर , नागौर, जोधपुर,
8 चना हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, झुंझुनू 
9 मूँग नागौर, जोधपुर, जालोर, जयपुर, बाड़मेर 
10 चवला सीकर, नागौर, झुंझुनू 
11 अरहर उदयपुर, टोंक, जयपुर 
12 मूँगफली बीकानेर, सीकर, चुरू, जयपुर 
13 सरसों  श्रीगंगानगर, भरतपुर, अलवर 
14 तारामीरा श्रीगंगानगर, जालोर, पाली, जयपुर 
15 सोयाबीन  झालावाड़, चित्तौड़, बारां 
16 कपास हनुमानगढ, कोटा, बूंदी, श्रीगंगानगर 
17 जीरा जालोर, जोधपुर, बाड़मेर 
18 धनिया बारां, झालावाड़, कोटा 


राजस्थान की फसलों की किस्मों



फसल किस्में
जौ ज्योति, राजकिरण
 मूंगफली  चंद्रा
 राई व सरसों पूसा कल्याणी, वरुणा, दुर्गामणि
 आलू  कुफरी
 तंबाकू निकोटीना टूबेकम, निकोटीना रास्टिका
 कपास बीकानेरी, नरमा, गंगानगर अगेती
 ज्वार राजस्थान चरी, 1 सी.एस.वी. 10
मोठ जड़िया, ज्वाला
ग्वार  दुर्गा विहार, दुर्गापुरा सफेद, दुर्गा जय
खरबूजा दुर्गापुरा, मधु, एच.एच.वाई.- 3
 मक्का माही कंचन, माही धवल, मोती कम्पोजिट
 चावल माही सुगंधा, बासमती, कावेरी, चंबल, परमल
गेंहू   सोना कल्याण, सोनालिका, मैक्सिकन, कोहिनूर, लाल बहादुर, मंगला, गंगासुनहरी


विभिन्न फसलों के वानस्पतिक नाम 


क्र.म. फसल वानस्पतिक नाम 
1 गेहूँ Triticum Aesstivum
2 जौ Hordeum Vulgare
3 ज्वार  Sorghum Vulgare
4 धान Oriza Sativa'
5 बाजरा Pennisetum Typhoideum
6 मक्का Zee Mays
7 चना Cicer Aretinum
8 मूँगफली  Archis hypogara
9 सरसों Brassica Compefris
10 तिल  Sesamum Indiumn
11 सोयाबीन  Glycine mat
12 कपास  Gossypipum Species
13 आलु Solanum Tuberosum
14 टमाटर  Lycopericum esculentume
15 पालक Spinacia Oleracea
16 मिर्च  Capsicume Species
17 आम Mungifere Indica
18 संतरा Citrus reticulata



फसल और पर्यावरण 


हमें मालूम है कि हमारे आस-पास का पर्यावरण स्वच्छ रहना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि हमें स्वयं एवं आस-पास की स्वच्छता रखनी चाहिए । साथ ही हमारे आस-पास हरियाली भी होनी चाहिए । फसलें भी हरी-भरी होती हैं एवं वर्षभर तक खेतों में किसी न किसी प्रकार की फसल हमेशा उगी हुई रहती है | हरियाली से वायुमण्डल शुद्ध रहता है । इसलिए फसलें पर्यावरण को सीधे-सीधे प्रभावित करती हैं, जो इस प्रकार है-

  1. परिवेश में फसलों से पर्यावरण शुद्ध रहता है ।
  2. फसलें, वायुमण्डल की आर्द्रता बनाए रखने में सहायक हैं।
  3. ये ऑक्सीजन-कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा नियन्त्रित एवं संतुलित बनाए रखने में उपयोगी होती है।
  4. आस-पास के वातावरण का तापमान भी नियन्त्रित रखती है ।
  5. आँधी, तूफान एवं बाढ़ से भूमि की ऊपरी उपजाऊ परत को बचाती है ।
  6. वायु एवं ध्वनि प्रदूषण कम करती है ।
  7. जन्तुओं को जीवन एवं सुरक्षा प्रदान करती है । 
 ये भी जानें - 

प्रोफेसर एम.एस. स्वामीनाथन

प्रोफेसर एम.एस. स्वामीनाथन

इनका जन्म 7 अगस्त, 4925 को कुम्मकोणम, तमिलनाडु में हुआ। ये आनुवंशिकी विशेषज्ञ भारत की हरित हम क्रान्ति में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका के लिए विख्यात हैं । इन्होंने 1966 में मेक्सिको के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के था साथ संकरित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूँ के संकर बीज के विकसित किए | 'हरित क्रान्ति' कार्यक्रम के तहत ज्यादा उपज कि देने वाले गेहूँ और चावल के बीज खेतों में बोए गए | इस क्रान्ति द ने भारत को दुनिया में खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना दिया था। एम.एस. स्वामीनाथन को विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन्‌ 1967 में पद्मश्री, 1972 में पद्म भूषण और 1989 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया ।

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