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कृषि प्रबंधन - krshi for reet

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कृषि हमारे देश की प्राचीन आर्थिक क्रिया है। पिछले हजारों वर्षों के दौरान भौतिक पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाज़ों के अनुसार खेती करने की विधियों में सार्थक परिवर्तन हुआ है। जीवन निर्वाह खेती से लेकर वाणिज्य खेती तक कृषि के अनेक प्रकार हैं। वर्तमान समय में भारत के विभिन्‍न भागों में निम्नलिखित प्रकार के कृषि तंत्र अपनाए गए हैं। प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि इस प्रकार की कृषि भारत के कुछ भागों में अभी भी की जाती है। 

कृषि प्रबंधन


Reet  एग्जाम की दृष्टि से कृषि प्रबंधन टॉपिक को तैयार करेंगे तो हम इस टॉपिक को तीन पार्ट में बांट देते हैं


 Part - 1 

कृषि प्रबंधन 

  1. कृषि पद्धतियाँ
  2. राजस्थान में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें 

कृषि के प्रकार

  1. प्रारंभिक जीवन निर्वाह कृषि 
  2. गहन जीविका कृषि 
  3. वाणिज्यिक कृषि 
  4. स्थानांतरित कृषि
  5. स्थानबध्द कृषि
  6. विस्तृत कृषि
  7. मिश्रित कृषि
  8. रोपण या बागवानी कृषि
  9. डेयरी फार्मिंग 
  10. ट्रक फार्मिंग 


प्रारंभिक जीवन निर्वाह कृषि


भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम कृषि औजारों जैसे लकड़ी के हल, डाओ (dao) और खुदाई करने वाली छड़ी तथा परिवार अथवा समुदाय श्रम की मदद से की जाती है। इस प्रकार की कृषि प्राय: मानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता और फसल उगाने के लिए अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपुयक्तता पर निर्भर करती है। 

slash and burn


यह 'कर्तन दहन प्रणाली' (slash and burn ) कृषि है। किसान जमीन के टुकड़े साफ करके उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाते हैं। जब मृदा की उर्वरता कम हो जाती है तो किसान उस भूमि के टुकड़े से स्थानांतरित हो जाते हैं और कृषि के लिए भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ करते हैं। कृषि के इस प्रकार के स्थानांतरण से प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ जाती है। चूँकि किसान उर्वरक अथवा अन्य आधुनिक तकनीकों का प्रयोग नहीं करते, इसलिए इस प्रकार की कृषि में उत्पादकता कम होती है। देश के विभिन्‍न भागों में इस प्रकार की कृषि को विभिन्‍न नामों से जाना जाता है।

उत्तर-पूर्वी राज्यों असम, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड में इसे 'झूम' कहा जाता है; मणिपुर में पामलू (pamlou) और छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में इसे 'दीपा' कहा जाता है।

'झूम' कर “कर्तन दहन प्रणाली ' (slash and burn ) कृषि को मैक्सिको और मध्य अमेरिका में ' मिल्पा' , वेनेजुएला में 'कोनुको', ब्राजील में 'रोका', मध्य अफ्रीका में 'मसोले ', इंडोनेशिया में 'लदांग' और वियतनाम में ' रे' के नाम से जाना जाता है।

भारत में भी यह प्रारंभिक किस्म की खेती अनेक नामों से जानी जाती है, जैसे मध्य प्रदेश में 'बेबर या दहिया', आंध्रप्रदेश में ' पोडु' अथवा 'पेंडा', ओडिशा में “पामाडाबी' या 'कोमान' या 'बरीगाँ', पश्चिम घाट में “कुमारी ', दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में 'वालरे' या 'वाल्टरे', हिमालयन क्षेत्र में 'खिल' , झारखंड में ' कुरुवा' और उत्तर पूर्वी प्रदेशों में 'झूम' आदि।

गहन जीविका कृषि


इस प्रकार की कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है। यह श्रम-गहन खेती है जहाँ अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव- रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है। 

गहन जीविका कृषि


क्या आप भारत के कुछ राज्यों के नाम बता सकते हैं जहाँ इस प्रकार की कृषि की जाती है? भूस्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है और किसान वैकल्पिक रोज़गार न होने के कारण सीमित भूमि से अधिकतम पैदावार लेने की कोशिश करते हैं। अत: कृषि भूमि पर बहुत अधिक दबाव है।

वाणिज्यिक कृषि


इस प्रकार की कृषि के मुख्य लक्षण आधुनिक निवेशों जैसे अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना है। कृषि के वाणिज्यीकरण का स्तर विभिन्‍न प्रदेशों में अलग-अलग है। उदाहरण के लिए हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्य की एक फसल है परंतु ओडिशा में यह एक जीविका फसल है।

क्या आप उन फसलों के कुछ और उदाहरण दे सकते हैं जो एक प्रदेश में वाणिज्यिक फसल के रूप में और दूसरे प्रदेश में जीविका फसल के रूप में उगाई जाती हैं? 

वाणिज्यिक कृषि

रोपण कृषि भी एक प्रकार की वाणिज्यिक खेती है। इस प्रकार की खेती में लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है। रोपण कृषि, उद्योग और कृषि के बीच एक अंतरापृष्ठ (interface) है। रोपण कृषि व्यापक क्षेत्र में की जाती है जो अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की सहायता से की जाती है। इससे प्राप्त सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है।
भारत में चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला इत्यादि महत्त्वपूर्ण रोपण फसले हैं। असम और उत्तरी बंगाल में चाय, कर्नाटक में कॉफी वहाँ की मुख्य रोपण फसलें हैं। चूँकि रोपण कृषि में उत्पादन बिक्री के लिए होता है।
इसलिए इसके विकास में परिवहन और संचार साधन से संबंधित उद्योग और बाज़ार महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।

शास्य प्रारूप


आपने भारत की भौतिक विविधताओं और संस्कृतियों की बहुलताओं के सबंध में अध्ययन किया है। ये देश में कृषि पद्धतियों और शस्य प्रारूपों में प्रतिबिंबित होता है। इसीलिए, देश में बोई जाने वाली फसलों में अनेक प्रकार के खाद्यानन और रेशे वाली फसलें, सब्जियाँ, फल, मसाले इत्यादि शामिल हैं। भारत में तीन शस्य ऋतुएँ हैं, जो इस प्रकार हैं - रबी, खरीफ और ज़ायद।

रबी फसलों को शीत ऋतु में अक्तूबर से दिसंबर के मध्य बोया जाता है और ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काटा जाता है। गेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों कुछ मुख्य रबी फसलें हैं। यद्यपि ये फसलें देश के विस्तृत भाग में बोई जाती हैं उत्तर और उत्तरी पश्चिमी राज्य जैसे - पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू- कश्मीर, उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश - गेहूँ और अन्य रबी फसलों के उत्पादन के लिए महत्त्वपूर्ण राज्य हैं। शीत ऋतु में शीतोष्ण पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा इन फसलों के अधिक उत्पादन में सहायक होती है। )| ! पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के | ' कुछ भागों में हरित क्रांति की सफलता भी उपर्युक्त रबी फसलों की वृद्धि में एक महत्त्वपूर्ण कारक है।

खरीफ फसलें देश के विभिन्‍न क्षेत्रों में मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और सितंबर-अक्तूबर में काट ली जाती हैं। इस ऋतु में बोई जाने वाली मुख्य फसलों में चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुर (अरहर) , मुूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन शामिल हैं। चावल की खेती मुख्य रूप से असम, पश्चिमी बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाणा, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र विशेषकर कोंकण तटीय क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश और बिहार में की जाती है। पिछले कुछ वर्षों में चावल पंजाब और हरियाणा में बोई जाने वाली महत्त्वपूर्ण फसल बन गई है। असम, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में धान की तीन फसलें - ऑस, अमन और बोरो बोई जाती हैं।

रबी और खरीफ फसल ऋतुओं के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसल को ज़ायद कहा जाता है। ज़ायद ऋतु में मुख्यत तरबूज, खरबूज़े, खीरे, सब्जियों और चारे की फसलों की खेती की जाती है। गन्ने की फसल को तैयार होने में लगभग एक वर्ष लगता है। 

 आज आपने क्या सीखा 

  1. कृषि प्रबंधन किसे कहते हैं? 
  2. आपने जाना कृषि की पद्धतियां के बारें में ।

आप कमेंट कर बता सकते हैं कि आपको पोस्ट कैसी लगी साथ ही आप का कोई क्वेश्चन हो हो तो आप कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं तो मिलते हैं नेक्स्ट पोस्ट में धन्यवाद फॉर रीडिंग माय पोस्ट ।


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