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राजस्थान की स्थिति🌏🌏
भारत के नक़्शे में राजस्थान की स्थिति पश्चिमी भाग में है। राजस्थान का आकर विषमकोणीय चतुर्भुज के सामान है।
राजस्थान का विस्तार पूर्व से पश्चिम तक 869 किलोमीटर है, जबकि उत्तर से दक्षिण तक 826 किलोमीटर है। अगर हम राजस्थान की स्थिति को अक्षांशीय व देशांतरीय रेखाओं में देखें तो राजस्थान का अक्षांशीय विस्तार 23° 03′ उत्तर से 30° 12′ उत्तर है जिसका अंतर 7° 09 मिनट है। राजस्थान का देशांतरीय विस्तार 69° 30′ पूर्वी देशांतर से 78° 17′ पूर्वी देशांतर है। जिसका अंतर 8° 47 मिनट है।
कर्क रेखा राजस्थान को बांसवाड़ा एवं डूंगरपुर जिलों में काटती है। इस वजह से 22 जून को यहाँ सूर्य बिल्कुल सीधा चमकता है।
राजस्थान की सीमा रेखा🌐🌐
राजस्थान से लगती अंतर्राष्ट्रीय सीमा
राजस्थान की स्थलीय सीमा 5920 किलोमीटर की है, जिसमे से 1070 किलोमीटर की अंतर्राष्ट्रीय सीमा है जो भारत को पाकिस्तान से अलग करती है। राजस्थान की इस अंतर्राष्ट्रीय सीमा को रेडक्लिफ रेखा (REDCLIF LINE) कहते है।
⚠️ 📢 Alert वर्तमान में स्थित कुछ और है this is old data.
राजस्थान के चार जिलों में अंतर्राष्ट्रीय सीमा सीमा लगाती है-
- श्रीगंगानगर
- बीकानेर
- जैसलमेर
- बाड़मेर
न्यूनतम अंतर्राष्ट्रीय सीमा बीकानेर से लगाती है जिसकी कुल लम्बाई 168 किलोमीटर है।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा के सबसे नजदीक जिला मुख्यालय श्रीगंगानगर है।
राजस्थान से लगती अंतर्राज्यीय सीमा
राजस्थान की कुल अंतर्राज्यीय सीमा 4850 किलोमीटर की है, जो भारत के पाँच राज्यों से लगाती है।
- पंजाब
- हरियाणा
- उत्तरप्रदेश
- मध्यप्रदेश
- गुजरात
राजस्थान सबसे छोटी अंतर्राज्यीय सीमा पंजाब के साथ साझा करता है। जिसकी कुल लम्बाई 89 किलोमीटर है।
राजस्थान का धौलपुर जिला मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश दोनों के साथ सीमा साझा करता है।
राजस्थान की भौगौलिक विस्तार
राजस्थान देश के कुल क्षेत्रफल का 10.41% भाग है। राजस्थान के मरुस्थल की उत्पति टेथिस सागर के तलछट से हुई है। राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का 61.11% भाग मरुस्थल है।राजस्थान में सबसे पहले सूर्योदय जगमोहन का पुरा(राज्य का सबसे पूर्वी गाँव) जिला धौलपुर में तथा सबसे बाद सूर्योदय कटरा (राज्य का सबसे पश्चिमी गाँव) जिला जैसलमेर में होता है। राजस्थान का सबसे उत्तरी गांव कोणा श्रीगंगानगर तथा बोरकुण्डा बांसवाड़ा सबसे दक्षिणी गाँव है।
राजस्थान के 8 जिले किसी भी अंतर्राष्ट्रीय या अंतर्राज्यीय सीमा का नहीं छूते।
- नागौर
- पाली
- जोधपुर
- अजमेर
- राजसमंद
- टोंक
- बूंदी
- दौसा
राजस्थान के एकीकरण के पश्चात बनाने वाले जिले
- धौलपुर – 15 अप्रैल 1982
- बारां – 10 अप्रैल 1991
- दौसा – 10 अप्रैल 1991
- राजसमंद – 10 अप्रैल 1991
- हनुमानगढ़ – 12 जुलाई 1994
- करौली – 19 जुलाई 1997
- प्रताप ग्रह – 26 जनवरी 2008
राजस्थान के संभाग
राजस्थान में संभागीय व्यवस्था की शुरूआत 1949 में हीरालाल शास्त्री सरकार द्वारा की गई।अप्रैल, 1962 में मोहनलाल सुखाडि़या सरकार के द्वारा संभागीय व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया। 15 जनवरी, 1987 में हरि देव जोशी सरकार के द्वारा संभागीय व्यवस्था की शुरूआत दुबारा की गई।
1. 1987 में राजस्थान का छठा संभाग अजमेर को बनाया गया।यह जयपुर संभाग से अलग होकर नया संभाग बना।
अरावली पर्वत श्रंखला (aravali parvat shrinkhla)
अरावली पर्वतमाला का निर्माण प्री-केम्ब्रियन युग में हुआ था। ये विश्व की प्राचीनतम पर्वतमाला है। इसकी कुल लम्बाई 692 कि. मी. है जो गुजरात के खेड़ ब्रम्हा से दिल्ली तक है। राजस्थान में इस पर्वतमाला की लम्बाई 550 कि. मी. है। अरावली पर्वत श्रंखला राज्य के 9% भूभाग पर फैली है। इसकी दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर पूर्व की और है।
- गुरुशिखर अरावली पर्वत श्रंखला की सबसे ऊँची चोटी है। इसकी ऊंचाई 1722 मीटर है। यहाँ चोटी माउंट आंबू में है।
- दूसरी सबसे ऊँची चोटी सेर सिरोही में है।
- तीसरी सबसे ऊँची चोटी जरगा उदयपुर में स्थित है।
अरावली की पहाड़ियों में 1300 मीटर की ऊंचाई पर राजस्थान का सबसे ऊँचा शहर माउन्ट आबू शहर स्थित है।
पूर्वी मैदान
राजस्थान के पूर्वी मैदानों का निर्माण चम्बल, बनास, बाणगंगा, माही एवं उनकी सहायक नदियों से हुआ है। यहाँ के मैदानों की मिट्टी जलोढ़ और दोमट है जो राजस्थान में सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी है।
डांग क्षेत्र – धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, कोटा जिलों का चम्बल द्वारा अपरदित उबड़ खाबड़ बीहड़ डांग क्षेत्र कहलाता है।
छप्पन का मैदान – प्रतापगढ़ एवं बांसवाड़ा के मध्य माही बेसिन छप्पन का मैदान कहलाता है।
दक्षिणी पूर्वी पठार
राजस्थान का दक्षिणी पूर्वी भाग इसके अंतर्गत आता है। इस क्षेत्र में सर्वाधिक नदियां बहती है। एवं सर्वाधिक वर्षा भी इसी भू-भाग पर होती है।
उपरमाल का पठार – भैंसरोड़गढ़ से बिजौलियां तक फैला हुआ क्षेत्र।
मुकुन्दरा हिल्स – कोटा एवं झालावाड़ के मध्य में स्थित पहाड़ियां जहाँ दर्रा अभयारण्य है।
विंद्यन कगार भूमि ->धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर का क्षेत्र।
दक्कन लावा पठार ->कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां का क्षेत्र।

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