विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव - विद्युत मोटर, जनरेटर तथा फ्लेमिंग के नियम
चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field):-
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| चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) |
किसी चुम्बक या धारावाही चालक के चारों ओर वह क्षेत्र, जिसमें उसके चुम्बकीय प्रभाव (आकर्षण/प्रतिकर्षण बल) का अनुभव किया जा सके, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है। इसे B से दर्शाते है तथा इसका मात्रक टेस्ला (T) होता है। चुम्बकीय क्षेत्र एक सदिश राशि (vector quantity) है।
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines):-
चुम्बक के चारों ओर वे काल्पनिक रेखाएँ जो चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती है, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कहलाती है। इनके गुण -
1. चुम्बक के बाहर ये उत्तरी ध्रुव (N) से दक्षिणी ध्रुव (S) की ओर तथा चुम्बक के अंदर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर चलती है, अर्थात् ये सदैव बंद वक्र (closed curves) होती है।
2. दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटती।
3. जहाँ रेखाएँ पास-पास होती है, वहाँ चुम्बकीय क्षेत्र प्रबल (strong) होता है तथा जहाँ दूर-दूर होती है, वहाँ क्षेत्र दुर्बल (weak) होता है।
धारावाही चालक का चुम्बकीय प्रभाव (ऑस्टेंड का प्रयोग):-
सर्वप्रथम हैंस क्रिश्चियन ऑस्टेंड ने यह खोज की कि किसी चालक तार में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसके चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है, जिसके कारण पास रखी दिक्सूचक (Compass) सुई विक्षेपित (deflect) हो जाती है। इसी घटना ने विद्युत व चुम्बकत्व के बीच गहरे संबंध को उजागर किया।
दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right Hand Thumb Rule):-
यदि किसी धारावाही सीधे चालक को दायें हाथ से इस प्रकार पकड़ा जाए कि अंगूठा विद्युत धारा की दिशा में संकेत करे, तो हाथ की अन्य अंगुलियाँ चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा को दर्शाती है।
परिनालिका (Solenoid):-
किसी बेलनाकार आकृति में लपेटे गए विद्युतरोधी तार की कुण्डली को परिनालिका कहते है। धारावाही परिनालिका के अंदर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ समान्तर व सीधी होती है, जो यह दर्शाती है कि क्षेत्र सभी बिन्दुओं पर समान (uniform) है — यह ठीक एक छड़ चुम्बक (Bar Magnet) की भांति व्यवहार करती है, जिसका एक सिरा N-ध्रुव व दूसरा S-ध्रुव होता है।
नोटः- परिनालिका के अंदर मुलायम लोहे की क्रोड (soft iron core) रखने पर एक शक्तिशाली चुम्बक बनता है, जिसे विद्युत चुम्बक (Electromagnet) कहते है। विद्युत चुम्बक अस्थायी (temporary) होते है, अर्थात् धारा प्रवाहित होने तक ही चुम्बकत्व रहता है।
फ्लेमिंग का बायें हाथ का नियम (Fleming's Left Hand Rule):-
यह नियम बताता है कि धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा क्या होगी। बायें हाथ की तर्जनी (forefinger), मध्यमा (middle finger) व अंगूठे को परस्पर लम्बवत फैलाने पर -
(1) तर्जनी - चुम्बकीय क्षेत्र (B) की दिशा दर्शाती है
(2) मध्यमा - विद्युत धारा (I) की दिशा दर्शाती है
(3) अंगूठा - चालक पर लगने वाले बल (F) की दिशा दर्शाता है
यह नियम "मोटर" के सिद्धांत को समझने के लिए प्रयुक्त होता है (विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा)।
फ्लेमिंग का दायें हाथ का नियम (Fleming's Right Hand Rule):-
यह नियम विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) में उत्पन्न धारा की दिशा बताता है। दायें हाथ की तर्जनी, मध्यमा व अंगूठे को परस्पर लम्बवत फैलाने पर -
(1) तर्जनी - चुम्बकीय क्षेत्र (B) की दिशा
(2) अंगूठा - चालक की गति (Motion) की दिशा
(3) मध्यमा - प्रेरित धारा (Induced Current) की दिशा
यह नियम "जनरेटर" के सिद्धांत को समझने के लिए प्रयुक्त होता है (यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा)।
याद रखने की Trick: बायाँ हाथ = मोटर (Left-Motor), दायाँ हाथ = जनरेटर (Right-Generator) — दोनों 'R' अक्षर से जुड़े है (Right-generatoR)
विद्युत मोटर (Electric Motor):-
विद्युत मोटर एक ऐसी युक्ति है जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरित करती है। यह फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम पर आधारित होती है। जब किसी आयताकार कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है, तो कुण्डली की भुजाओं पर विपरीत दिशा में बल लगने से कुण्डली में घूर्णन (rotation) उत्पन्न होता है।
मोटर के प्रमुख भाग - आर्मेचर कुण्डली, क्षेत्र चुम्बक (स्थायी चुम्बक), विभक्त वलय दिक्परिवर्तक (Split-ring Commutator), ब्रश। दिक्परिवर्तक हर आधे चक्कर के बाद कुण्डली में धारा की दिशा बदल देता है, जिससे कुण्डली निरंतर एक ही दिशा में घूमती रहती है।
उपयोग - पंखे, वाशिंग मशीन, मिक्सर-ग्राइंडर, इलेक्ट्रिक वाहनों आदि में।
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction):-
जब किसी चालक कुण्डली व चुम्बकीय क्षेत्र के बीच आपेक्षिक गति (relative motion) होती है, अर्थात् कुण्डली से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स (flux) बदलता है, तो कुण्डली में विद्युत धारा प्रेरित (induce) हो जाती है। इस घटना की खोज माइकल फैराडे ने की थी, इसलिए इसे फैराडे का विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का नियम भी कहते है।
विद्युत जनरेटर (Electric Generator):-
विद्युत जनरेटर एक ऐसी युक्ति है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करती है। यह विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत तथा फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम पर आधारित होती है। जब कोई कुण्डली चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाई जाती है, तो कुण्डली से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स बदलता रहता है, जिससे उसमें विद्युत धारा प्रेरित होती है।
AC व DC जनरेटर में अंतर -
| विशेषता | AC जनरेटर (प्रत्यावर्ती धारा) | DC जनरेटर (दिष्ट धारा) |
|---|---|---|
| प्रयुक्त युक्ति | दो सर्पी वलय (Slip Rings) | विभक्त वलय दिक्परिवर्तक (Split-Ring Commutator) |
| धारा की दिशा | प्रत्येक अर्द्ध-चक्कर में बदलती रहती है | सदैव एक ही दिशा में रहती है |
| भारत में आवृत्ति (Frequency) | 50 हर्ट्ज (Hz) | लागू नहीं (शून्य आवृत्ति) |
| उदाहरण | घरों में आपूर्ति की जाने वाली विद्युत | बैटरी, सेल |
घरेलू विद्युत परिपथ (Domestic Electric Circuits):-
भारत में घरों में 220V, 50Hz की प्रत्यावर्ती धारा (AC) की आपूर्ति की जाती है। घरेलू वायरिंग में तीन तार होते है -
1. लाइव तार (Live Wire) - लाल/भूरे रंग का, इसमें 220V विभवांतर रहता है।
2. उदासीन/न्यूट्रल तार (Neutral Wire) - काले/नीले रंग का, इसका विभव शून्य होता है।
3. भू-संपर्क तार (Earth Wire) - हरे रंग का, यह उपकरणों के धात्विक आवरण को धरती से जोड़ता है ताकि रिसाव (leakage) की स्थिति में झटका (shock) न लगे।
लाइव व न्यूट्रल तारों के बीच सामान्यतः 220V का विभवांतर रहता है। सुरक्षा हेतु परिपथ में फ्यूज़ (Fuse) लगाया जाता है, जो अतिभारण (overloading) या लघुपथन (short-circuit) की स्थिति में स्वतः टूटकर परिपथ को खुला (open) कर देता है।
संख्यात्मक उदाहरण (Numerical) -
प्रश्नः घरेलू परिपथ में यदि लाइव तार व न्यूट्रल तार आपस में सीधे स्पर्श कर जाएँ (लघुपथन), तो परिपथ में प्रतिरोध व धारा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Ans. लघुपथन (Short Circuit) होने पर परिपथ का प्रतिरोध अत्यंत कम (लगभग शून्य) हो जाता है, जिसके कारण ओम के नियम (I=V/R) के अनुसार परिपथ में धारा अत्यधिक बढ़ जाती है — इसी अत्यधिक धारा से फ्यूज़ तार पिघलकर परिपथ को सुरक्षित रूप से तोड़ देता है।
रोचक तथ्य -
1. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron) एक ऐसी युक्ति है जो चुम्बकीय क्षेत्र के प्रयोग से आवेशित कणों (जैसे प्रोटॉन) को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करती है — यह चिकित्सा (कैंसर उपचार) व अनुसंधान में प्रयुक्त होती है।
2. पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुम्बक की भांति व्यवहार करती है, जिसके कारण दिक्सूचक (Compass) सुई सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है।
3. MRI (Magnetic Resonance Imaging) मशीन में शक्तिशाली विद्युत चुम्बक का उपयोग होता है, जो शरीर के अंदरूनी अंगों की स्पष्ट image बनाने में मदद करता है।
"विद्युत" श्रृंखला की समीक्षा -
यह पोस्ट हमारी "विद्युत" श्रृंखला की दूसरी कड़ी है। यदि आपने अभी तक विद्युत धारा एवं ओम का नियम वाली पोस्ट नहीं पढ़ी है, तो पहले उसे पढ़ें — वहाँ से मूल अवधारणाएँ (धारा, विभवांतर, प्रतिरोध) समझने के बाद यह पोस्ट पढ़ने में आसानी होगी।
Q ➤ फ्लेमिंग का बायें हाथ का नियम किस सिद्धांत को समझाने हेतु प्रयुक्त होता है?
Q ➤ विद्युत जनरेटर किस नियम पर आधारित है?
Q ➤ विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की खोज किसने की थी?
Q ➤ घरेलू विद्युत आपूर्ति में कौनसा तार धरती से जोड़ा जाता है?
Q ➤ भारत में घरेलू विद्युत आपूर्ति की आवृत्ति कितनी होती है?

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