प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण एवं वायुमंडलीय अपवर्तन - इंद्रधनुष, आकाश का नीला रंग
प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light):-
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| प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light) |
श्वेत प्रकाश (सूर्य के प्रकाश) के अपने घटक सात रंगों में विभाजित होने की घटना को वर्ण-विक्षेपण कहते है। सबसे पहले सर आइजक न्यूटन ने काँच के प्रिज्म की सहायता से यह सिद्ध किया कि श्वेत प्रकाश वास्तव में सात रंगों का मिश्रण है।
सात रंगों का क्रम (VIBGYOR) - बैंगनी, जामुनी (नील), नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल
वर्ण-विक्षेपण का कारण - श्वेत प्रकाश के विभिन्न रंगों (तरंगदैर्ध्य) की काँच में चाल भिन्न-भिन्न होती है, जिसके कारण उनके अपवर्तनांक भी भिन्न होते है। परिणामस्वरूप प्रत्येक रंग अलग-अलग कोण पर मुड़ता है।
बैंगनी रंग सबसे अधिक विचलित (deviate) होता है, क्योंकि इसकी तरंगदैर्ध्य सबसे कम व अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है। लाल रंग सबसे कम विचलित होता है, क्योंकि इसकी तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक व अपवर्तनांक सबसे कम होता है।
नोटः- प्रिज्म में अपवर्तन के कारण रंगों का विक्षेपण होता है, परन्तु सभी रंगों की निर्वात (vacuum) में चाल समान (3×10⁸ मी/से) होती है।
इंद्रधनुष (Rainbow):-
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| इंद्रधनुष (Rainbow) |
इंद्रधनुष वर्ण-विक्षेपण की एक प्राकृतिक व सुंदर घटना है, जो वर्षा के बाद जब सूर्य की पीठ की ओर खड़े होकर आकाश में देखने पर दिखाई देता है। इंद्रधनुष बनने में तीन प्रक्रियाएँ शामिल होती है -
(1) अपवर्तन - सूर्य की किरण वर्षा की बूँद में प्रवेश करते समय अपवर्तित होकर रंगों में विभक्त हो जाती है।
(2) पूर्ण आंतरिक परावर्तन - विभाजित रंग बूँद के अंदर की पिछली सतह से परावर्तित होते है।
(3) पुनः अपवर्तन - परावर्तित किरणें बूँद से बाहर निकलते समय पुनः अपवर्तित होती है, जिससे हमें बूँदों के समूह से सात रंगों की चाप (arc) के रूप में इंद्रधनुष दिखाई देता है।
नोटः- इंद्रधनुष हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा (opposite side) में ही दिखाई देता है, इसीलिए इसे देखते समय दर्शक की पीठ सूर्य की ओर होनी चाहिए।
प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light):-
जब प्रकाश किसी सूक्ष्म कणों (जैसे धूल कण, जल की बूँदें, गैस के अणु) से टकराकर विभिन्न दिशाओं में बिखर जाता है, तो इसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहते है। इसे टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) भी कहते है।
प्रकीर्णन की मात्रा प्रकाश की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करती है — कम तरंगदैर्ध्य वाला प्रकाश (नीला) अधिक प्रकीर्णित होता है तथा अधिक तरंगदैर्ध्य वाला प्रकाश (लाल) कम प्रकीर्णित होता है।
HINT- वर्ण-विक्षेपण (Dispersion) और प्रकीर्णन (Scattering) को Exam में अक्सर आपस में उलझाया जाता है। वर्ण-विक्षेपण प्रिज्म/जल की बूँदों से अपवर्तन के कारण होता है (इंद्रधनुष), जबकि प्रकीर्णन वायुमंडल के सूक्ष्म कणों से टकराने के कारण होता है (आकाश का रंग)।
आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है?
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| आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है? |
वायुमंडल में उपस्थित सूक्ष्म गैस के अणु प्रकाश का प्रकीर्णन करते है। चूँकि नीले रंग की तरंगदैर्ध्य कम होती है, अतः यह अन्य रंगों की तुलना में सबसे अधिक प्रकीर्णित होकर हमारी आँखों तक पहुँचता है। इसी कारण दिन के समय आकाश नीला दिखाई देता है।
नोटः- अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष (space) से आकाश काला दिखाई देता है, क्योंकि वहाँ वायुमंडल न होने से प्रकीर्णन नहीं होता।
सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है?
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| सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है? |
सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य की किरणों को हम तक पहुँचने के लिए वायुमंडल की अपेक्षाकृत अधिक मोटी परत से गुजरना पड़ता है। इस दौरान कम तरंगदैर्ध्य वाला नीला प्रकाश लगभग पूरी तरह प्रकीर्णित होकर बिखर जाता है, जबकि अधिक तरंगदैर्ध्य वाला लाल प्रकाश सबसे कम प्रकीर्णित होने के कारण सीधे हमारी आँखों तक पहुँच जाता है। इसीलिए सूर्य लाल/नारंगी दिखाई देता है।
वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric Refraction):-
पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों का घनत्व भिन्न-भिन्न होने के कारण प्रकाश का अपवर्तन होते रहना वायुमंडलीय अपवर्तन कहलाता है। इसके प्रमुख उदाहरण -
1. तारों का टिमटिमाना (Twinkling of Stars) - तारों से आने वाला प्रकाश वायुमंडल की लगातार बदलती परतों से गुजरते हुए बार-बार अपवर्तित होता है, जिससे तारे की आभासी स्थिति (apparent position) लगातार बदलती रहती है और तारा टिमटिमाता हुआ प्रतीत होता है।
नोटः- ग्रह (जैसे शुक्र, शनि) नहीं टिमटिमाते, क्योंकि वे तारों से बहुत नज़दीक होने के कारण विस्तारित स्रोत (extended source) की भांति व्यवहार करते है, जिससे उनसे आने वाली किरणों के अपवर्तन का औसत प्रभाव लगभग समाप्त हो जाता है।
2. सूर्योदय पहले व सूर्यास्त बाद में दिखना - वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले दिखाई देने लगता है तथा वास्तविक सूर्यास्त के लगभग 2 मिनट बाद तक दिखाई देता रहता है।
3. क्षितिज पर सूर्य/चन्द्रमा का चपटा (flattened) दिखना - क्षितिज के निकट वायुमंडलीय अपवर्तन असमान होने के कारण सूर्य व चन्द्रमा अण्डाकार (चपटे) दिखाई देते है।
वर्ण-विक्षेपण, प्रकीर्णन व वायुमंडलीय अपवर्तन में अंतर -
| घटना | कारण | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| वर्ण-विक्षेपण (Dispersion) | रंगों के भिन्न अपवर्तनांक के कारण अपवर्तन | इंद्रधनुष, प्रिज्म से स्पेक्ट्रम |
| प्रकीर्णन (Scattering) | सूक्ष्म कणों से टकराकर प्रकाश का बिखरना | आकाश नीला, सूर्योदय/सूर्यास्त लाल |
| वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric Refraction) | वायुमंडल की परतों के भिन्न घनत्व से अपवर्तन | तारों का टिमटिमाना, सूर्य का जल्दी दिखना |
चारों टॉपिक की एक साथ समीक्षा -
"प्रकाश" अध्याय की तैयारी अब यहाँ पूरी हो जाती है। इंद्रधनुष व आकाश के रंग को समझने के लिए अपवर्तन के वही नियम काम आते है जो हमने दर्पण व लेंस में पढ़े थे। अगर आपने अभी तक समतल दर्पण-उत्तल व अवतल दर्पण, प्रकाश का अपवर्तन-उत्तल व अवतल लेंस तथा मानव नेत्र एवं उससे संबंधित दोष वाली पोस्ट नहीं पढ़ी है, तो इन्हें भी ज़रूर पढ़ें — चारों पोस्ट मिलकर पूरे अध्याय की सम्पूर्ण व exam-ready तैयारी करा देंगी।
Q ➤ वर्ण-विक्षेपण किसे कहते है?
Q ➤ इंद्रधनुष बनने में कौन-कौनसी प्रक्रियाएँ शामिल होती है?
Q ➤ आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है?
Q ➤ तारे क्यों टिमटिमाते है परन्तु ग्रह नहीं?
Q ➤ सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखता है?




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