राजस्थान में गौवंश
राजस्थान में गौवंश,गीर, नागौरी,थारपारकर, राठी, कांकरेज, मालवी, साँचौरी, मेवाती (कोठी), जर्सी, हॉलिसटिन, रेड डेन
👉राजस्थान में गौवंश
👉 राजस्थान के पशुपालन में गौवंश का महत्वपूर्ण योगदान है 👉राजस्थान में गौवंश के प्रासि क्षेत्र:-
राज्य में सर्वाधिक गौवंश क्रमश: उदयपुर व
बीकानेर में तथा न्यूनतम धौलपुर में है। 👉प्रमुख नस्लें
1. गीर:-अजमेर, भीलवाड़ा, किशनगढ़, चित्तौड़गढ़, बूँदी
मूल स्थान-गुजरात का गिर वन व काठियावाड़
2. थारपारकर:- जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, साँचोर (जालौर)
अन्य नाम :-रेंडा व अजमेरी। अधिक दूध के लिए प्रसिद्द ।
3. नागौरी:- नागौर, जोधपुर जिले का उत्तरीपूर्वी भाग व
नोखा (बीकानेर)
मूल स्थान- नागौर जिले का सुहालक प्रदेश
4. राठी:- बीकानेर,श्रीगंगानगर, जैसलमेर व चुरू के
कुछ भाग बाड़मेर, साँचौर व नेहड़ क्षेत्र (जालौर) व
जोधपुर के कुछ भाग
अन्य विवरण :-लाल सिंधी व साहीवाल की मिश्रित नस्ल।राजस्थान की कामधेन।
5. कांकरेज:-
मूल स्थान - सिंध क्षेत्र व मालानी गाँव (जैसलमेर)।
6. हरियाणवी व चुरू:-सीकर, झुंझुनुँ, जयपुर, गंगानगर, हनुमानगढ़
मुल स्थान-रोहतक, हिसार व गुडगाँव (हरियाणा
7. मालवी:- झालावाड़, कोटा, डुंगरपुर, आदि ।
मूल स्थान- मध्यप्रदेश का मालवा क्षेत्र ।
8. साँचौरी:-साँचौर, उदयपुर, पाली, सिर…