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रामदेव जी की कथा
इतिहासकारों के अनुसार श्री कृष्ण के अवतार रामदेव जी का अवतार सन 1442 में भादवा सुदी दूज के दिन राजस्थान के पोकरण के तॅवर वंशीय राजा अजमल के यहां हुआ था.
राजा अजमल श्री कृष्ण की भक्ती में लीन रहने के साथ ही धर्मपरायण राजा थे लेकिन वह निसंतान थे जिसके कारण वह काफी दुखी रहते थे. रामदेव जी के पिता राजा अजमल जो कि द्वारकाधीश के परम भक्त थे वह हमेशा अपने राज्य की सुख शांति की मनोकामना के लिए द्वारका जाते थे.
एक बार उनके राज्य में भयानक अकाल पड़ा और राज्य में अच्छी बारिश की मनोकामना लेकर अजमल जी द्वारिकाधीश पहुंच गए ऐसा माना जाता है कि भगवान द्वारिकाधीश की कृपा से उनके राज्य में बहुत अच्छी बारिश हुई.
बारिश के ही दिन में जब एक दिन सुबह किसान अपने खेतों में जा रहे थे. तो रास्ते में उन्हें उनके राजा अजमल मिल गए किसान उन्हें देख वापस घर की तरफ जाने लगे यह देख राजा ने पूछा कि वापस क्यों जा रहे हो तो किसानों ने बताया कि राजा अजमल जी आप निसंतान है इसलिए आपके सामने आने से अपशगुन हो गया है और अपशगुन के समय में हम बुआई नहीं करेंगे.
राजा ने जैसे ही यह सुना तो बहुत दुखी हुए लेकिन एक कुशल शासक और गरी…