हनुमान सिंह बुड़ानिया: राजस्थान के किसानों के मसीहा और स्वतंत्रता सेनानी

नुमान सिंह बुदानिया की जीवनी: राजस्थान के चुरू जिले के दूधवा खारा गाँव के इस वीर स्वतंत्रता सेनानी और किसान नेता के जीवन, संघर्ष और उनकी अमर विरासत के
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हनुमान सिंह बुड़ानिया: राजस्थान के किसानों के मसीहा और स्वतंत्रता सेनानी
हनुमान सिंह बुड़ानिया हनुमान सिंह बुड़ानिया प्रारंभिक जीवन स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका उपलब्धियां विरासत जन्म: 1900 मृत्यु: 26 मार्च 1993 पद: स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता प्रसिद्धि: चुरू जिले के किसान नेता जीवनसाथी: लक्ष्मी देवी, सुगनी देवी प्रारंभिक जीवन हनुमान सिंह बुड़ानिया का जन्म 1900 में राजस्थान के चुरू जिले के गाँव दूधवा खारा में हुआ था। उनका परिवार बुड़ानिया गोत्र के जाट समुदाय से था। उस समय जाटों को शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी, इसलिए उन्होंने अपनी बहन के ससुराल हिसार जिले के बालसमंद गाँव में शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्होंने लाहौर से 'शिक्षा विशारद' की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने बीकानेर रियासत में पुलिस सेवा में काम किया, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनकी लगन ने उन्हें 1942 में नौकरी छोड़ने के लिए प्रेरित किया। स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका हनुमान सिंह बुदानिया ने 1942 में स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके गाँव दूधवा खारा को स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बनाया गया। उन्होंने बीकानेर …