Devli - देवली में 1857 का विद्रोह, मीर आलम खां,देवली में कोटा कन्टिन्जेन्ट, टोंक नवाब वजीरुद्दीन दौला, 1817 में नवाब अमीर खाँ पिण्डारी,अमीरगढ़ का किला
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Devli - देवली में 1857 का विद्रोह
देवली में 1857 का विद्रोह इतिहास देवली शहर की स्थापना 1854 में अंग्रेजों द्वारा की गई थी। देवली में विद्रोह का नेतृत्व मीर आलम खां द्वारा किया गया था। नीमच के सैनिकों द्वारा देवली में आग लगा दी गई और अंग्रेज अधिकारियों ने जहाजपुरा (भीलवाड़ा) में शरण ली। टोंक नवाब वजीरुद्दीन दौला एक अंग्रेज भक्त थे। देवली में कोटा कन्टिन्जेन्ट सैनिक थे। 3 जून, 1857 ई. को रात्रि 11 बजे नीमच के सैनिकों ने भी शस्त्र उठा लिये। इनका नेतृत्व हीरासिंह व अलिबेग कर रहे थे इसी समय खबर आयी कि मेवाड़ पॉलिटिकल एजेंट कसान शावर्स बेदला के राब बख्तसिंह के नेतृत्व में सेना लेकर नीमच आ रहा है। इस पर क्रांतिकारी सिपाहियों ने लूट का माल लेकर बैण्ड बताते हुए छावनी से कूच किया। इन सिपाहियों ने देवली पहुँचे कर वहाँ भी छावनी को लूटा। यहाँ से क्रांतिकारी सिपाही टोंक तथा कोटा होते हुए दिल्ली पहुँचे और दिल्ली के क्रांतिकारियों से मिलकर अंग्रेज सेना पर आक्रमण किया। नीमच के विद्रोही सैनिकों के देवली की ओर जाने के बाद जोधपुर के सैनिकों ने कैप्टेन हार्डकेसल के नेतृत्व में और मेवाड़ के सैनिकों ने कैप्टेन शावर्स के नेतृत्व में उनका पोछा…